गुजरात : कोरोना संकट के कारण कक्षा 10 का कोर्स कम हुआ तो परीक्षा देने डेढ़ लाख छात्र बढ़ गये!

(Photo : IANS)

गुजरात में 10वीं की परीक्षा रद कर पाना मुश्किल, रिपिटर विद्यार्थियों की संख्या ने बढाई चिंता

कोरोना के संक्रमण के कारण सीबीएसई की ओर से कक्षा दसवीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। ऐसे में गुजरात में भी परीक्षा रद्द करने की मांग अभिभावक कर रहे हैं। इस मुद्दे पर हाई कोर्ट में पिटीशन भी दाखिल की गई है लेकिन, गुजरात में कक्षा दसवीं की परीक्षा रद्द करने असंभव है। क्योंकि यहां पर तीन लाख से अधिक रिपीटर है। इन रिपीटर विद्यार्थियों के साथ इस साल 12,36,000 विद्यार्थी दर्ज हुए हैं जो कि पिछले साल की अपेक्षा डेढ़ लाख अधिक है। इसके अलावा गुजरात बोर्ड की प्रथम सत्र की परीक्षा भी स्कूलों में प्रथम सत्र की परीक्षाए कई स्थानो पर व्यवस्थित तौर से नहीं हो सकी है। इतना ही कई स्थानो पर तो प्राथमिक परीक्षा भी नहीं ली जा सकती है।
एक विषय की परीक्षा देने वाले आइसोलेटेड विद्यार्थियों की संख्या 50 हजार है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की ओर से इस साल दसवीं बोर्ड की परीक्षा कर दी गई है और इस साल दसवीं में पहले की स्कूल के स्तर की परीक्षाएं और प्रोजेक्ट के आधार पर विद्यार्थियों को मेरिट आधारित प्रमोशन देने का तय किया गया है। सीबीएसई की तर्ज पर गुजरात बोर्ड की परीक्षाएं रद्द कर दी जाए ऐसी मांग गुजरात में भी उठी है। कोरोना के कारण इस साल गुजरात में स्कूल में नहीं चलने के कारण कक्षा 10वीं और 12वीं का सिलेबस 30% कम किया गया है। कई विद्यार्थियों ने रिपीटर के तौर पर परीक्षा देने के लिए फॉर्म भरा है। पिछली साल की अपेक्षा इस साल डेढ़ लाख विद्यार्थी बढे हैं।
कुल साढे बारह लाख के करीब विद्यार्थी परीक्षा देंगे। इतना ही नहीं बोर्ड के इतिहास में अब तक के सबसे अधिक विद्यार्थी दर्ज हुए हैं। ऐसे में 10वीं की बोर्ड की परीक्षा रद्द की जाए या मेरिट के आधार पर प्रमोशन दिया जाए कई विद्यार्थियों को किस तरह पास किया जाए यह प्रश्न है। 300000 विद्यार्थी रिपीटर है। दसवीं के बाद इतनी बड़ी संख्या में एडमिशन के लिए 11वीं के क्लास भी नहीं है। इतना ही नहीं कोरोना के कारण 8 शहरों में सत्र की परीक्षाएं ऑफलाइन नहीं ली जा सकने के कारण ऑनलाइन ली गई थी। सीबीएसई की ओर से कंटिन्यूज एंड कंपैरेटिव एनालिसिस भेज मूल्यांकन करके मेरिट बेज प्रमोशन से दिया जाएगा, लेकिन गुजरात में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

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