गुजरात : कोरोना न हो इसलिये लोगों ने मान रखी थी मन्नत, अब पूरी करने दर्शन जा रहे!

(Photo Credit : gujratsamachar.com)

घर के किसी भी सदस्य को कोरोना ना हो इसके लिए मानी थी मन्नत, टीकाकरण को लेकर लोगों का यह है सोचना

कोरोना की गाइड लाइन में छूट मिलने के साथ ही मंदिर और धर्म स्थान भी खुल गए हैं। सरकार द्वारा नियंत्रण हटाए जाने के बाद कई लोग मंदिर पहुंचे थे। कोरोना के बाद जैसे ही राजकोट में स्थित चोटिला मंदिर खुला, वैसे ही वहां पर भी भारी भीड़ देखने मिली। जिसमें अधिकतर लोग खुद अपनी मानता उतारने के लिए मंदिर आए थे।  सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान भवन की एक टीम भी चोटिला पहुंची थी। जहां उन्होंने मंदिर में भक्तों की कोरोना के प्रति मानसिकता का सर्वे किया था। 
मनोविज्ञान की टीम द्वारा जो सर्वे गया उसमें पता चला कि मंदिर में आए 54% लोगों ने परिवार के किसी भी सदस्य को कोरोना ना हो इसके लिए मानता ली थी। जो पूर्ण होने के बाद वह मंदिर में अपनी मानता पूरी करने के लिए आए थे। जब लोगों से पूछा गया कि क्या उन्होंने टीकाकरण करवाया? तो अधिकतर लोगों ने इस सवाल का जवाब ना में देते हुए कहा कि उन्होंने अभी तक टीकाकरण नहीं करवाया और करवाएंगे भी नहीं।
टीकाकरण नहीं करवाने का कारण पूछने पर कई लोगों ने बताया कि टीकाकरण करवाने से शरीर कमजोर होता है और टीके की कई सारी साइड इफेक्ट भी है। उन लोगों का कहना है कि जिसकी रक्षा हो माता कर रही है उन्हें टीकाकरण करवाने की क्या जरूरत है। इस बारे में बात करते हुए मनोविज्ञान भवन के अध्यापकों ने बताया कि भारतीय संस्कृति में आस्था और श्रद्धा सालों से जुड़ी हुई है। पर कोरोना जैसी महामारी के समय में टीकाकरण ही सबसे सही उपचार है। ऐसे में उन्होंने मात्र वैक्सीन लेने वाले व्यक्ति को ही मंदिर में प्रवेश मिले ऐसी व्यवस्था करने की अपील भी की है। जिससे की अधिक से अधिक लोगों को टीका लेने के लिए जागृत किया जा सके। 

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