31 दिसम्बर को जीएसटी काउंसिल की बैठक; क्या कपड़े पर कायम रहेगी 5% जीएसटी?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की होगी बैठक

1 जनवरी से टेक्सटाईल वैल्यू चैइन के सभी उत्पादों पर जीएसटी की दर पांच से बारह प्रतिशत होने जा रही है। वैसे सूरत सहित देश भर के कपड़ा व्यापारी जीएसटी काउंसिल के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और आंदोलन की सुगबुगाहट भी है। जीएसटी दर वृद्धि के विरोध में सभी व्यापारिक संगठन एक सुर से गुरुवार को एक दिवसीय बंद की घोषणा की है। व्यापारिक संगठनों के बंद के ऐलान के बाद राजनीतिक चर्चा भी होने लगी है।  ऐसे में कल 31 दिसंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की बैठक होगी और अन्य बातों के साथ साथ जीएसटी की दर बृद्धि पर राज्य के मंत्रियों के पैनल की रिपोर्ट पर चर्चा होगी। यह एक प्रत्यक्ष बैठक होगी, जिसमें कुछ सामानों पर लगे जीएसटी दरों में सुधार पर भी चर्चा होगी।
आपको बता दें कि 46वीं जीएसटी परिषद की बैठक 31 दिसंबर को दिल्ली में होगी. 30 दिसंबर को राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ पूर्व बजट परिषद होगी जिसमें मंत्री द्वारा परिषद को जीएसटी दरों में परिवर्तन को लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत किये जायेंगे। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र के कर अधिकारियों से बने फिटमेंट कमेटी ने स्लैब और रेट में बदलाव और छूट सूची से आइटम को हटाने के संबंध में जीओएम को कई "व्यापक" सिफारिशें की हैं। वर्तमान में, GST 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की चार स्तरीय स्लैब संरचना है। आवश्यक वस्तुओं को या तो कर मुक्त रखा जाता है या सबसे कम स्लैब में कर लगाया जाता है, जबकि विलासिता और अवगुण वस्तुओं पर उच्चतम स्लैब लागू होता है। उच्चतम स्लैब में विलासिता और अवगुण वस्तुओं पर उपकर लगाया जाता है।
बता दें कि राजस्व पर स्लैब युक्तिकरण के प्रभाव को संतुलित करने के लिए 12 और 18 प्रतिशत स्लैब के विलय के साथ-साथ छूट श्रेणी से कुछ वस्तुओं को बाहर करने की भी मांग की गई है। पश्चिम बंगाल के पूर्व वित्त मंत्री अमित मित्रा ने केंद्रीय वित्त मंत्री से टेक्सटाइल में प्रस्तावित बढ़ोतरी को 5 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा है कि इससे लगभग एक लाख कपड़ा इकाइयां बंद हो जाएंगी और 15 लाख नौकरियां चली जाएंगी। वहीं तेलंगाना के उद्योग मंत्री के टी रामाराव ने भी केंद्र से जीएसटी दरों को बढ़ाने की अपनी प्रस्तावित योजना को वापस लेने का आग्रह किया है। उद्योग ने गरीबों के कपड़ों को महंगा बनाने के अलावा विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र और एमएसएमई के लिए उच्च अनुपालन लागत का हवाला देते हुए कर में पांच प्रतिशत की वृद्धि का विरोध किया है।

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