सूरत : विधायक चैतर वसावा को 7 साल की सज़ा, वडोदरा जेल भेजा गया, विधायक पद पर भी संकट

नर्मदा सेशंस कोर्ट का फैसला; फॉरेस्ट कर्मचारियों पर हमला, धमकी और वसूली के मामले में सजा

सूरत : विधायक चैतर वसावा को 7 साल की सज़ा, वडोदरा जेल भेजा गया, विधायक पद पर भी संकट

सूरत। गुजरात की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब नर्मदा जिले की अतिरिक्त सत्र अदालत ने आम आदमी पार्टी के डेडियापाड़ा विधायक चैतर वसावा को फॉरेस्ट विभाग के कर्मचारियों पर हमले, धमकी और वसूली के मामले में दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने उनकी पत्नी शकुंतला वसावा समेत कुल 9 आरोपियों को भी दोषी मानते हुए 7-7 वर्ष की सजा और प्रत्येक पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। दोषियों में 5 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं। फैसले के बाद चैतर वसावा और उनकी पत्नी को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच वडोदरा सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

गुजरात विधानसभा के उपाध्यक्ष पूर्णेश मोदी ने कहा कि कानून के अनुसार यदि किसी विधायक को दो वर्ष से अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता समाप्त मानी जाती है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कानूनी विभाग की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्ताव भेजा जाएगा और उसके बाद सीट रिक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उच्च न्यायालय सजा पर स्थगन (स्टे) देता है, तभी संबंधित व्यक्ति को विधायक के रूप में मान्यता मिल सकती है। अन्यथा सीट रिक्त मानी जाएगी।

सरकारी पक्ष के अनुसार वर्ष 2023 में फॉरेस्ट विभाग के कर्मचारियों ने वन भूमि से अवैध कब्जे और पौधों को हटाने की कार्रवाई की थी। आरोप है कि इसके बाद चैतर वसावा ने कर्मचारियों को अपने घर बुलाकर धमकाया, मारपीट की और हवा में फायरिंग कर डराया।

सरकारी वकील वंदना भट्ट ने अदालत में कहा कि अगले दिन चैतर वसावा के सहयोगियों ने कर्मचारियों से 30-30 हजार रुपये, कुल 60 हजार रुपये की मांग की। कर्मचारियों द्वारा पैसे की व्यवस्था न कर पाने पर उनके वरिष्ठ अधिकारी ने ऑनलाइन राशि ट्रांसफर की, जिसका डिजिटल रिकॉर्ड साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। 

अदालत ने सरकारी गवाहों की गवाही, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर सभी 9 आरोपियों को दोषी पाया। न्यायालय ने यह भी माना कि कुछ आरोपी पहले एक अन्य मामले में प्रोबेशन पर रिहा हुए थे और उसके बाद दोबारा अपराध में शामिल पाए गए। मामला सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा, धमकी और फायरिंग जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा था।

चैतर वसावा के वकील एस.के. जोशी ने कहा कि यह राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित झूठा मामला है। उन्होंने कहा कि फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी जाएगी और जमानत के लिए अपील दायर की जाएगी।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने फैसले के बाद कहा कि चैतर वसावा आदिवासी समाज के प्रमुख नेता हैं और उनके खिलाफ साजिश के तहत कार्रवाई की गई है।

वहीं भाजपा सांसद धवल पटेल ने कहा कि यह चैतर वसावा का पहला मामला नहीं है और उनके खिलाफ पहले भी कई गंभीर आरोप दर्ज रहे हैं।

आप नेता गोपाल इटालिया ने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय की आवाज उठाने के कारण चैतर वसावा को निशाना बनाया गया है और उनके खिलाफ झूठे शिकायतकर्ता खड़े किए गए।

अदालत के इस फैसले के बाद गुजरात की राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना जताई जा रही है, खासकर तब जब डेडियापाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव की संभावना भी अब चर्चा में आ गई है।

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