सूरत : निर्माणाधीन एलिवेटेड ब्रिज के गर्डर विवाद पर नया खुलासा, रेलवे ने माना 17 मई को हुई थी तकनीकी घटना
सहारा दरवाजा स्थित एमएमटीएच प्रोजेक्ट में पियर SP-31 पर निर्माण कार्य के दौरान अस्थायी संरचना धंसी; सीटको अधिकारियों और रेलवे के बयानों में विरोधाभास
सूरत। सहारा दरवाजा क्षेत्र में रेलवे गुड्स यार्ड के पास निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड परियोजना से जुड़े गर्डर गिरने के वायरल वीडियो को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
मामले की पड़ताल में सामने आया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो 17 मई, 2026 का है। इस घटना को लेकर परियोजना से जुड़े सीटको अधिकारियों और रेलवे प्रशासन के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास देखने को मिला है।
जानकारी के अनुसार, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्टेशन हब (एमएमटीएच ) परियोजना के तहत सहारा दरवाजा से सूरत रेलवे स्टेशन के पीछे वराछा लंबे हनुमान रोड तक लगभग 5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाया जा रहा है। करीब 496 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण कार्य जारी है।
घटना के संबंध में सीटको के लाइजन मैनेजर राहुल राघव ने दावा किया कि कोई गर्डर नहीं टूटा और वायरल वीडियो सूरत का नहीं है। वहीं, स्ट्रक्चर डीपीएम हेमंत अग्रवाल ने कहा कि ड्राइंग में बदलाव के कारण संबंधित हिस्से को हटाया जा रहा था और कार्य संशोधित डिज़ाइन के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने किसी प्रकार की लापरवाही से भी इनकार किया।
हालांकि, पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) विनीत अभिषेक ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि 17 मई, 2026 को एमएमटीएच फेज-2 परियोजना के अंतर्गत पियर SP-31 पर निर्माण कार्य के दौरान तकनीकी घटना हुई थी।
उनके अनुसार, पियर कैप/पोर्टल बीम की कंक्रीटिंग के दौरान स्कैफोल्डिंग पाइप जॉइंट्स खिसक जाने से अस्थायी स्टेजिंग गीले कंक्रीट के भार के कारण धंस गई थी।
रेलवे ने स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्र पुराने गुड्स यार्ड परिसर के भीतर परियोजना नियंत्रण क्षेत्र में स्थित था और पूरी तरह से घेराबंदी की गई थी। घटना के कारण न तो रेल यातायात प्रभावित हुआ और न ही किसी यात्री या कर्मचारी के घायल होने की सूचना मिली। रेलवे सेवाएं और ट्रैफिक संचालन पूरी तरह सामान्य रहे।
रेलवे प्रशासन के अनुसार, घटना के तुरंत बाद सुरक्षा मानकों के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई और प्रभावित हिस्से को हटाकर स्थल को सुरक्षित बनाया गया। रेलवे ने कहा कि निर्माण कार्यों में सुरक्षा, गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
इस मामले में रेलवे और परियोजना अधिकारियों के अलग-अलग बयानों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से तब, जब रेलवे ने घटना की पुष्टि की है, जबकि कुछ परियोजना अधिकारियों ने प्रारंभिक स्तर पर ऐसी किसी घटना से ही इनकार किया था। अब इस पूरे प्रकरण को लेकर परियोजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है।
