सूरत : चैंबर और जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल के संयुक्त सेमिनार में जीएसटी अपील प्रक्रिया पर दी गई विस्तृत जानकारी
जीएसटीएटी को बताया गया करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक मंच; जीएसटी अपील दाखिल करने की प्रक्रिया और कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन
सूरत। सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) और जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की संयुक्त पहल से शुक्रवार, 19 जून 2026 को सरसाना स्थित उषाकांत कंचनलाल मारफतिया हॉल में ‘जीएसटीएटी अपील फाइलिंग एवं प्रक्रिया जागरूकता कार्यक्रम – जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील की समझ’ विषय पर एक विशेष सेमिनार आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में उद्यमियों, कर सलाहकारों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, अधिवक्ताओं तथा करदाताओं को जीएसटी अपील प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के स्वागत भाषण में एसजीसीसीआई के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने कहा कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (जीएसटीएटी) जीएसटी व्यवस्था में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह मंच व्यापार एवं उद्योग जगत को समयबद्ध और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने बताया कि एसजीसीसीआई लगातार उद्योग, व्यापार और करदाताओं के हितों की रक्षा के लिए कार्यरत है। पिछले 12 दिनों के दौरान चैंबर ने जीएसटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर राज्य और केंद्र सरकार के समक्ष प्रतिनिधित्व किया है।
इनमें जीएसटीएटी में द्वितीय अपील की समय-सीमा में राहत, निर्णय आदेश अंग्रेजी भाषा में जारी करने, जीएसटी प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग, अपील संबंधी प्रावधानों पर स्पष्टीकरण, जीएसटी क्रेडिट विवादों के समाधान तथा “मेरा जीएसटी–मेरा गुजरात” जैसी प्रोत्साहन योजनाओं के सुझाव शामिल हैं।
जीएसटीएटी के उपाध्यक्ष जी. एम. पटेल ने कहा कि जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के समय जहां मासिक संग्रह लगभग 90 हजार करोड़ रुपये था, वहीं मई 2026 तक यह बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि राजस्व वृद्धि के साथ उद्योग और करदाताओं से जुड़े प्रश्न एवं विवाद भी बढ़े हैं, जिन्हें कम करने के लिए अपील प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जीएसटीएटी के सदस्य आर. जी. हडवानी ने अपील दाखिल करने की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अपीलकर्ता को आदेश की प्रति, अपील के आधार, तथ्यों का विवरण, आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित प्री-डिपॉजिट के साथ अपील तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले की मजबूती उसके तथ्यों पर निर्भर करती है और तथ्य ही पूरी न्यायिक प्रक्रिया की रीढ़ होते हैं।
वहीं जीएसटीएटी के सदस्य संजय द्विवेदी ने कहा कि अपील में सफलता के लिए कारण बताओ नोटिस का समय पर उत्तर देना, दस्तावेजों का उचित संधारण, कानूनी आधारों का स्पष्ट उल्लेख तथा संबंधित अधिसूचनाओं, परिपत्रों और न्यायिक निर्णयों का संदर्भ देना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता अजय सुहाग ने सुरक्षा राशि, कोर्ट फीस, प्री-डिपॉजिट तथा जीएसटीएटी में विभिन्न प्रकार की अपीलों की प्रक्रिया पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर चैंबर के मानद सचिव परेश लाठिया, विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि, करदाता एवं पेशेवर बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन चैंबर की जीएसटी समिति के सलाहकार हेमंत देसाई ने किया, जबकि समिति के सह-अध्यक्ष रोहन देसाई ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
अंत में प्रश्नोत्तर सत्र में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के विभिन्न प्रश्नों के समाधान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के समापन पर चैंबर के मानद कोषाध्यक्ष अतुल पटेल ने सभी प्रतिभागियों और वक्ताओं का आभार व्यक्त किया।
