सूरत : भावनाओं से सजी ‘एक शाम पापा के नाम’ काव्य गोष्ठी सम्पन्न

महिला काव्यमंच के आयोजन में कवयत्रियों ने कविताओं के माध्यम से पिता के प्रेम, त्याग और स्मृतियों को किया जीवंत

सूरत : भावनाओं से सजी ‘एक शाम पापा के नाम’ काव्य गोष्ठी सम्पन्न

महिला काव्यमंच की ओर से 18 जून को सिटी लाइट स्थित डॉ. सुषमा अय्यर के आवास पर ‘एक शाम पापा के नाम’ काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवयत्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पिता के स्नेह, त्याग और जीवन में उनके महत्व को भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद डॉ. सुषमा अय्यर ने स्वागत वक्तव्य दिया। गोष्ठी की अध्यक्ष डॉ. पूनम गुजरानी ने अपनी कविता ‘अपनी छाती चौड़ी करके खुद को पिता बताते हैं’ प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया।

काव्य गोष्ठी में सुमन शाह ने ‘पिता के साये में बेफिक्री’ विषय पर कविता प्रस्तुत की। बिंदु शर्मा ने अपनी रचना के माध्यम से पिता से जुड़ी यादों को साझा किया। सचिव रजनी जैन ने ‘जनक-जननी, सुत-सुता’ भाव को अभिव्यक्त करते हुए काव्य पाठ किया।

रेणुका झा ने पिता को देवतुल्य बताते हुए कविता प्रस्तुत की, वहीं मंजु मित्तल ने मां गंगा के किनारे गंगा के साथ हुए संवाद का भावपूर्ण चित्रण किया। नीरु तलवार ने गजल की प्रस्तुति देकर वातावरण को काव्यमय बना दिया।

सुमन लता शर्मा ने ‘फादर्स डे रोज होता हमारे लिए’ कविता के माध्यम से पिता के प्रति भाव व्यक्त किए। डॉ. सुषमा अय्यर ने अपने पिता की स्मृतियों को साझा करते हुए काव्य पाठ किया। रश्मि दधीच ने बचपन की यादों का किस्सा सुनाते हुए बताया कि कैसे पापा ने डर दूर किया।

कुलदीप कौर ने बचपन की स्मृतियों को याद करते हुए ‘पापा के नाम’ कविता प्रस्तुत की। नीति शर्मा ने वकील पिता के काले कोट के पीछे छिपे सफेद दिल की भावनाओं को कविता के माध्यम से व्यक्त किया। छाया खंडेलवाल ने भी पिता पर अपनी कविता प्रस्तुत की, जबकि छोटी गुड़िया ने ‘पापा मेरे हीरो’ कहकर सभी का दिल जीत लिया। ‘एक शाम पापा के नाम’ काव्य गोष्ठी में बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे और सभी ने कविताओं के माध्यम से पिता के प्रति व्यक्त भावनाओं की सराहना की।

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