वडोदरा : कनाडा से लौटे उद्यमी ने वडोदरा में शुरू की ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर कंपनी, ‘टॉक्सिक फ्री खेती, कैंसर फ्री लिविंग’ का लक्ष्य

 वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस @ मध्य गुजरात में एग्रीकॉन न्यूट्रीटेक लिमिटेड के प्रयासों की चर्चा, डॉ. नरेंद्र घेलानी और परिवार कर रहे हैं सस्टेनेबल खेती को बढ़ावा देने का कार्य

वडोदरा : कनाडा से लौटे उद्यमी ने वडोदरा में शुरू की ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर कंपनी, ‘टॉक्सिक फ्री खेती, कैंसर फ्री लिविंग’ का लक्ष्य

गुजरात में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस @ मध्य गुजरात के दौरान एग्रीकॉन न्यूट्रीटेक लिमिटेड के प्रयासों और सस्टेनेबल खेती की दिशा में किए जा रहे कार्यों की चर्चा हुई। कंपनी देश के कृषि क्षेत्र में टॉक्सिक फ्री और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य कर रही है।

एग्रीकॉन न्यूट्रीटेक लिमिटेड का मुख्य उद्देश्य “टॉक्सिक फ्री खेती, कैंसर फ्री लिविंग” के संकल्प के साथ किसानों को सुरक्षित, वैज्ञानिक और प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना है। कंपनी का मानना है कि खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ और सुरक्षित खाद्य उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण प्रयास भी है।

कंपनी के संस्थापक डॉ. नरेंद्र घेलानी ने बताया कि किसानों, मिट्टी और मानव स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक खेती के नए तरीके विकसित किए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य ऐसी कृषि व्यवस्था तैयार करना है जिसमें उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य की भी रक्षा हो।

डॉ. नरेंद्र घेलानी ने कनाडा में करीब डेढ़ दशक बिताने के बाद वडोदरा लौटकर इस दिशा में कार्य शुरू किया। उनके साथ उनके पुत्र श्रीजी घेलानी, जिन्होंने कनाडा में उच्च शिक्षा प्राप्त की है, और पुत्री रुजवी घेलानी, जिन्होंने अमेरिका से मेडिसिन एवं बायोटेक्नोलॉजी में उच्च शिक्षा हासिल की है, भी इस मिशन से जुड़े हैं। एग्रीकॉन न्यूट्रीटेक लिमिटेड ने माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी, लाभकारी बैक्टीरिया, फंगी, पोषक तत्वों और प्राकृतिक समाधानों के माध्यम से खेती को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया है। कंपनी ने इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट और इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट को मिलाकर “न्यूट्रीटेक फार्मिंग” मॉडल विकसित किया है।

कंपनी के अनुसार, यह तकनीक मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, पौधों को मजबूत बनाने और फसलों को प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रखने में सहायक है। इसके माध्यम से किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त करने के साथ-साथ लंबे समय तक टिकाऊ खेती करने में मदद मिल सकती है।

डॉ. घेलानी ने कहा कि किसानों को उत्पादन और सुरक्षा के बीच किसी एक विकल्प को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। आधुनिक विज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से ऐसी खेती संभव है, जो किसानों की आय, मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य तीनों के लिए लाभकारी हो। कंपनी के मुताबिक बायो फर्टिलाइजर और बायो पेस्टिसाइड के उपयोग से रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। आने वाले समय में इस तरह के प्रयास जहरीले रसायनों से मुक्त खेती और स्वस्थ समाज के निर्माण में 
महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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