सूरत : तीन अनाथ बेटियों को मिला नया परिवार, गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर भावुक माहौल में सौंपा गया दत्तक ग्रहण

पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत और कलेक्टर तेजस परमार की मौजूदगी में मुंबई, कच्छ-भुज और सूरत के परिवारों ने अपनाईं तीन मासूम बच्चियां

सूरत : तीन अनाथ बेटियों को मिला नया परिवार, गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर भावुक माहौल में सौंपा गया दत्तक ग्रहण

सूरत। सूरत में एक भावनात्मक और प्रेरणादायक समारोह के दौरान तीन अनाथ बालिकाओं को उनके नए परिवारों को सौंपा गया। भारत सरकार की केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन तीनों बच्चियों को दत्तक ग्रहण करने वाले परिवारों को सौंपा गया।

इस अवसर पर सूरत पुलिस आयुक्त श्री अनुपम सिंह गहलोत और जिला कलेक्टर श्री तेजस परमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सूरत के सामाजिक सुरक्षा विभाग एवं बाल संरक्षण गृह में रह रही इन तीन बालिकाओं को विशेष दत्तक ग्रहण संस्था (Special Adoption Agency) के माध्यम से नए परिवार मिले।

समारोह के दौरान कटारगाम स्थित वी.आर. पोपावाला बालगृह में खुशी और भावुकता का माहौल देखने को मिला। वर्षों से संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे तीन परिवारों के घर बेटियों के रूप में खुशियां पहुंचीं।

पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इन बच्चियों को नए माता-पिता का स्नेह और परिवार मिला है।

उन्होंने कहा कि जब भी कोई बच्चा लावारिस अवस्था में मिलता है, तब जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और बाल संरक्षण संस्थाएं मिलकर उसकी सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया सावधानीपूर्वक पूरी करती हैं।

उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि किसी भी मजबूरी की स्थिति में नवजात या छोटे बच्चों को खुले स्थानों, कूड़ेदान या सुनसान क्षेत्रों में न छोड़ें। ऐसे बच्चों की सुरक्षा और उचित देखभाल के लिए बाल संरक्षण संस्थाएं और शिशुगृह उपलब्ध हैं, जहां उनका बेहतर पालन-पोषण किया जाता है।

जिला कलेक्टर तेजस परमार ने बच्चियों को परिवार की ‘लक्ष्मी’ बताते हुए कहा कि आज तीन मासूम बेटियों को नया परिवार और नया भविष्य मिला है।

उन्होंने बताया कि इन बच्चियों में से एक बालिका ‘हस्ती’ को पहले डिंडोली क्षेत्र से पुलिस द्वारा सुरक्षित बरामद किया गया था। अन्य दो बालिकाएं भी अलग-अलग परिस्थितियों में मिली थीं और उनका पालन-पोषण बालगृह में किया गया।

कलेक्टर ने बताया कि CARA पोर्टल के माध्यम से दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी तरीके से संपन्न की जाती है। इच्छुक दंपतियों का ऑनलाइन पंजीकरण, सामाजिक एवं आर्थिक मूल्यांकन तथा अन्य आवश्यक जांच के बाद ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चा सुरक्षित और बेहतर भविष्य वाले परिवार को सौंपा जाए।

दत्तक ग्रहण की गई तीनों बालिकाओं में से ‘हस्ती’ को मुंबई के एक परिवार ने अपनाया है, जबकि दूसरी बालिका को कच्छ-भुज के एक परिवार और तीसरी बालिका को सूरत के एक परिवार ने दत्तक ग्रहण किया है।

समारोह के दौरान पुलिस आयुक्त और जिला कलेक्टर ने दत्तक ग्रहण करने वाले परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए बच्चियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

साथ ही जिला बाल संरक्षण इकाई, सामाजिक सुरक्षा विभाग, बालगृह के कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों के समर्पित कार्यों की सराहना की।

इस अवसर पर जिला सामाजिक सुरक्षा कार्यालय के उपनिदेशक श्री निनामा, जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी एल.बी. पटेल, जिला बाल संरक्षण अधिकारी विजय परमार, संरक्षण अधिकारी चिराग रामावत, विशेष दत्तक ग्रहण संस्था की प्रबंधक कोमल शाह, प्रशासनिक टीम, पुलिस विभाग के अधिकारी तथा दत्तक ग्रहण करने वाले परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे।

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