सूरत : खाड़ी में बाढ़ रोकने के लिए नगर निगम का हाईटेक एक्शन प्लान, दिल्ली से मंगवाई गईं 4 फ्लोटिंग मशीनें
540 घंटे में 7300 क्यूबिक मीटर गाद और कचरा हटाया गया, 95 किमी खाड़ियों की सफाई मिशन पर तेज़ी
सूरत । मानसून के दौरान हर साल खाड़ी में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से जूझने वाले सूरत शहर को राहत देने के लिए इस बार नगर निगम ने हाईटेक तकनीक का सहारा लिया है।
पारंपरिक मशीनों की सीमाओं को देखते हुए सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने दिल्ली से विशेष “फ्लोटिंग मशीनें” मंगाकर खाड़ियों की सफाई और ड्रेजिंग अभियान को तेज़ कर दिया है।
नगर निगम के प्री-मानसून एक्शन प्लान के तहत मार्च महीने से ही व्यापक स्तर पर सफाई कार्य शुरू कर दिया गया था। इन अत्याधुनिक मशीनों का मुख्य उद्देश्य उन दुर्गम और संकरे हिस्सों तक पहुंचना है, जहां सामान्य पोकलेन मशीनें काम नहीं कर पाती थीं। पानी पर तैरने और जमीन पर चलने में सक्षम ये मशीनें खाड़ियों में जमा गाद और कचरे को प्रभावी ढंग से हटाने का काम कर रही हैं।
डिप्टी कमिश्नर डी.सी. भगवाकर ने बताया कि पहले उपयोग में ली जाने वाली पारंपरिक पोकलेन मशीनें केवल किनारों से ड्रेजिंग कर पाती थीं, जिससे सफाई कार्य सीमित रह जाता था।
लिंबायत ज़ोन में हाल ही में कम बूम लंबाई के कारण हुए हादसे के बाद निगम ने लंबी बूम वाली मशीनों और दिल्ली से मंगाई गई फ्लोटिंग मशीनों का संयुक्त उपयोग शुरू किया है।
इससे सफाई क्षमता और कार्य की प्रभावशीलता कई गुना बढ़ गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस नई तकनीक से निचले इलाकों में जलभराव की समस्या में बड़ी राहत मिलेगी।
नगर निगम के अनुसार शहर की लगभग 95 किलोमीटर लंबी खाड़ियों की सफाई का लक्ष्य तय किया गया है। सभी ज़ोन में पहले चरण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जबकि दूसरे चरण में अब तक 45 किलोमीटर क्षेत्र की सफाई पूरी हो चुकी है। शेष 50 किलोमीटर का कार्य 20 जून से पहले पूरा करने के लिए दो एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं।
इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम ने कुल 10 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें से 3.40 करोड़ रुपये विशेष रूप से फ्लोटिंग मशीनों के लिए खर्च किए जा रहे हैं। दिल्ली की विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा कोयली क्रीक, मीठी क्रीक सहित विभिन्न खाड़ियों में कुल चार एडवांस्ड एम्फीबियन और फ्लोटिंग मशीनें तैनात की गई हैं।
इन मशीनों को खाड़ियों की चौड़ाई और गहराई के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में लगाया गया है। छोटी खाड़ियों के लिए कम बकेट और छोटी बूम वाली मशीनें तथा चौड़ी और गहरी खाड़ियों के लिए लंबी बूम और बड़ी बकेट वाली मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इससे उन क्षेत्रों में भी सफाई संभव हो पाई है, जहां पहले मशीनें नहीं पहुंच पाती थीं।
क्रॉलर माउंटेड तकनीक पर आधारित ये मशीनें कम पानी में भी आसानी से रेंगकर काम कर सकती हैं। चार वर्ष पहले उधना की कांकर खाड़ी में इस तकनीक का सीमित प्रयोग किया गया था, जिसे इस वर्ष बड़े पैमाने पर लागू किया गया है।
नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग ने शहर के 23 किलोमीटर लंबे ऐसे हिस्सों की पहचान की है, जहां हर वर्ष जलभराव की गंभीर समस्या होती है। इनमें से 10.50 किलोमीटर लंबे हिस्से में कम से कम एक मीटर गहराई तक ड्रेजिंग की जा रही है। अब तक मशीनों ने लगातार 540 घंटे काम करते हुए लगभग 7300 क्यूबिक मीटर गाद और कचरा हटाया है, जिससे खाड़ियों की जल वहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
नगर निगम ने इस बार पुलों के नीचे जमा गाद और कचरे को हटाने पर भी विशेष ध्यान दिया है। आमतौर पर पुलों के पिलरों के बीच सफाई नहीं हो पाने से पानी का बहाव बाधित होता था और जलस्तर पीछे की ओर बढ़ जाता था।
अब फ्लोटिंग मशीनों को सीधे पुलों के नीचे उतारकर सफाई की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि मानसून के दौरान भी ये मशीनें खाड़ियों में सक्रिय रहकर बहते कचरे को हटाएंगी और शहरवासियों को बाढ़ जैसी स्थिति से राहत दिलाने में मदद करेंगी।
