सूरत : विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी के प्रस्ताव का विरोध तेज

विस्कोस वीवर्स एसोसिएशन ने कपड़ा मंत्रालय और टेक्सटाइल कमेटी के सामने रखी आपत्ति, कहा— ड्यूटी लागू हुई तो सूरत की वीविंग इंडस्ट्री पर गहरा संकट

सूरत : विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी के प्रस्ताव का विरोध तेज

सूरत। विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने के प्रस्ताव के खिलाफ सूरत की विस्कोस वीवर्स इंडस्ट्री ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

विस्कोस वीवर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय और मुंबई स्थित टेक्सटाइल कमेटी के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति देकर इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए यार्न स्पिनरों की मांगों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

एसोसिएशन का कहना है कि जिन स्पिनरों ने 75 डेनियर से अधिक विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की मांग की है, वे आज भी करीब 60 वर्ष पुरानी PSY तकनीक और मशीनरी के आधार पर उत्पादन कर रहे हैं।

एसोसिएशन के अनुसार, स्पिनरों द्वारा उत्पादित करीब 40 प्रतिशत यार्न निम्न गुणवत्ता का होता है, ऐसे में पुरानी तकनीक पर आधारित उत्पादन को संरक्षण देने के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी की मांग उचित नहीं मानी जा सकती।

वीवर्स एसोसिएशन ने यह भी सवाल उठाया कि स्पिनर खुद यह स्वीकार कर रहे हैं कि 75 डेनियर से कम वाले यार्न में उन्हें लाभ हो रहा है, जबकि 75 डेनियर से अधिक वाले यार्न में नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में, लाभदायक श्रेणी के यार्न का उत्पादन बढ़ाने के बजाय घाटे वाले यार्न के लिए संरक्षण मांगना कई सवाल खड़े करता है।

एसोसिएशन ने बताया कि वर्तमान में देश में 75 डेनियर से कम श्रेणी के केवल लगभग 6 हजार टन यार्न का उत्पादन हो रहा है, जबकि करीब 40 हजार टन यार्न का आयात किया जा रहा है। इसके बावजूद घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं।

एसोसिएशन ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज़ (DGTR) की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि DGTR की टीम ने बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञ को साथ लिए केवल स्पिनिंग यूनिट्स का दौरा किया, जबकि वीविंग यूनिट्स, जो इस प्रस्ताव से सबसे अधिक प्रभावित होंगी, उनका निरीक्षण नहीं किया गया।

एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी स्थिति में एंटी-डंपिंग ड्यूटी के संबंध में तैयार की गई रिपोर्ट की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।

वीवर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू की गई, तो सूरत की करीब 10 हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली वीविंग इंडस्ट्री पर गंभीर असर पड़ेगा। इसके साथ ही लगभग 1000 MSME उद्यमियों और करीब 4.5 लाख लोगों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है।

एसोसिएशन का कहना है कि बीते सात वर्षों में सूरत के बुनकरों ने बैंक लोन, संपत्तियां गिरवी रखकर और ऊंचे ब्याज पर वित्त जुटाकर एयरजेट, रेपियर और रेपियर जैक्वार्ड जैसी आधुनिक मशीनरी में भारी निवेश किया है। यदि आयातित धागा महंगा हुआ, तो वीविंग उद्योग आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा।

एसोसिएशन ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2007 से 2017 के दौरान भी विस्कोस फिलामेंट यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू थी। उस अवधि में स्पिनरों ने अच्छा मुनाफा कमाया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी 50 से 60 वर्ष पुरानी तकनीक और मशीनरी को अपग्रेड करने की दिशा में पर्याप्त निवेश नहीं किया।

वीवर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि सूरत की वीविंग इंडस्ट्री, MSME सेक्टर और लाखों श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए।