वडोदरा : 90 साल पुराना ‘अरुढ महल’ बना वडोदरा की शाही विरासत का प्रतीक
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के रूममेट रहे डॉ. रामचंद्र रावजी पवार द्वारा निर्मित ऐतिहासिक हवेली आज हेरिटेज होमस्टे और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र
वडोदरा के डांडिया बाजार क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक हवेली “अरुढ महल” आज भी शहर की सांस्कृतिक विरासत, शाही इतिहास और पारंपरिक वास्तुकला की अनमोल पहचान बना हुआ है। वर्ष 1936 में निर्मित इस भव्य हवेली ने करीब 90 वर्षों का सफर तय कर लिया है। लगभग 17,000 वर्गफीट क्षेत्र में फैले इस महल में 22 विशाल कमरे, पारंपरिक आंगन और पुराने दौर की आकर्षक वास्तुकला आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
अरुढ महल का निर्माण प्रसिद्ध विधिवेत्ता डॉ. रामचंद्र रावजी पवार ने कराया था, जिन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की थी। वे डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के रूममेट के रूप में भी जाने जाते थे। विदेश से लौटने के बाद उन्होंने महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ के प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में अमरेली के दीवान बने। भारतीय संत और योगी सिद्धारुढ स्वामी के सम्मान में इस हवेली का नाम “अरुढ महल” रखा गया।
महल का पारंपरिक आंगन आज भी शहर की भागदौड़ के बीच शांति और पुरातन संस्कृति का अनुभव कराता है। हवेली में मौजूद पुरानी रसोई की चिमनी को शहर की सबसे प्राचीन चिमनियों में से एक माना जाता है, जो इसकी ऐतिहासिक अहमियत को और खास बनाती है। यहां आज भी पुराने फर्नीचर, दुर्लभ कलाकृतियां और पारंपरिक जीवनशैली की झलक देखने को मिलती है।
वर्तमान में अरुढ महल को एक हेरिटेज होमस्टे के रूप में विकसित किया गया है, जहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटक वडोदरा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को करीब से अनुभव कर रहे हैं। यह हवेली गुजराती म्यूजिक वीडियो, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और फिल्म शूटिंग के लिए भी लोकप्रिय लोकेशन बन चुकी है। इसका खुला ऐतिहासिक आंगन और पारंपरिक माहौल कलाकारों और प्रोड्यूसर्स को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
हाल के वर्षों में शीतल पवार और उनके परिवार ने अरुढ महल की विरासत को संरक्षित करने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। परिवार हवेली की मूल वास्तुकला, एंटीक वस्तुओं और पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। शीतल पवार का उद्देश्य केवल एक होटल व्यवसाय विकसित करना नहीं, बल्कि “हेरिटेज होमस्टे” के माध्यम से वडोदरा और गुजरात की समृद्ध संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाना है।
उनका मानना है कि जब पर्यटक किसी ऐतिहासिक घर और स्थानीय परिवार के साथ समय बिताते हैं, तो वे केवल एक स्थान नहीं देखते, बल्कि उस शहर की संस्कृति, परंपराओं और इतिहास को भी गहराई से महसूस करते हैं। अरुढ महल आज केवल एक हवेली नहीं, बल्कि वडोदरा की गौरवशाली विरासत और सांस्कृतिक इतिहास की जीवंत पहचान बन चुका है।
