राजकोट : इंटरनेशनल म्यूज़ियम डे पर वॉटसन म्यूज़ियम में वल्लभीपुर की विरासत प्रदर्शित, दिव्यांगों के लिए भी खास पहल
प्राचीन सिक्कों, मुहरों और शंख की चूड़ियों की फोटो प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र; सूर्य देव की मूर्ति का 3-डी टैक्टाइल मॉडल और ब्रेल विवरण भी उपलब्ध
इंटरनेशनल म्यूज़ियम डे 2026 के अवसर पर राजकोट स्थित वॉटसन म्यूज़ियम में वल्लभीपुर की खुदाई से प्राप्त प्राचीन अवशेषों और महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों पर आधारित विशेष फोटो प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। यह प्रदर्शनी भारत की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने का प्रयास है।
म्यूज़ियम के प्रभारी क्यूरेटर एवं पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष डॉ. सिद्ध शाह ने बताया कि प्रदर्शनी में वल्लभीपुर उत्खनन से प्राप्त तांबे के सिक्के, प्राचीन मुहरें, शंख की चूड़ियां तथा अन्य दुर्लभ पुरावशेषों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। इन प्रदर्शनों के माध्यम से प्राचीन नगरों की संरचना, विकास और उस समय की जीवनशैली को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में आने वाले दर्शकों को विस्तृत जानकारी देने के लिए एक विशेष शोध टीम भी तैनात की गई है।
इसी अवसर पर म्यूज़ियोलॉजी विभाग की सहायक प्राध्यापक अन्विका कामथ द्वारा दृष्टिबाधित लोगों के लिए विशेष टैक्टाइल प्रोटोटाइप तैयार किया गया है, ताकि वे भी संग्रहालय की धरोहरों को स्पर्श के माध्यम से महसूस कर सकें।
म्यूज़ियम में स्थापित भगवान सूर्य की प्राचीन प्रतिमा का 3-डी टैक्टाइल मॉडल इस प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। अन्विका कामथ ने बताया कि यह मॉडल विशेष रूप से कम दृष्टि वाले और दृष्टिबाधित लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिससे वे मूर्ति की कलात्मकता और शिल्पकला को स्पर्श के जरिए समझ सकें। इसके साथ ब्रेल लिपि में जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। साथ ही QR कोड की सुविधा दी गई है, जिसे स्कैन कर दर्शक संबंधित वस्तु का इतिहास ऑडियो-विजुअल माध्यम से जान सकते हैं।
प्रदर्शनी देखने पहुंचीं प्रेरणाबा ने कहा कि संग्रहालय में संरक्षित विरासत को नजदीक से देखना और उसके बारे में जानना बेहद रोचक अनुभव है। उन्होंने कहा कि वे अपने कक्षा 10 में पढ़ने वाले बेटे के साथ प्रदर्शनी देखने आई हैं और हर विद्यार्थी को ऐसे संग्रहालयों का भ्रमण अवश्य करना चाहिए, ताकि वे देश के इतिहास और संस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकें।
डॉ. सिद्ध शाह ने भारत की ऐतिहासिक धरोहरों को सामने लाने के लिए देशभर में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन कार्यों की सराहना की। उन्होंने इस प्रदर्शनी के आयोजन में सहयोग देने वाले पुरातत्व विभाग के डॉ. पंकज शर्मा तथा फाइन आर्ट्स फैकल्टी की डीन डॉ. अंबिका पटेल का आभार व्यक्त किया।
