सूरत : SGCCI और ITTA ने आयोजित किया ‘टेक्निकल टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव 2026

एक्सपर्ट्स बोले— ट्रेडिशनल टेक्सटाइल्स से आगे बढ़कर ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने का समय, टेक्निकल टेक्सटाइल्स में सूरत के लिए अपार संभावनाएं

सूरत : SGCCI और ITTA ने आयोजित किया ‘टेक्निकल टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव 2026

सूरत। सधर्न गुजरात चैंबर ऑफ कोमर्स एन्ड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) और इंडियन टेक्निकल टेक्सटाइल एसोसिएशन (आईटीटीए) द्वारा सरसाना स्थित यूकेएम हॉल में ‘टेक्निकल टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव 2026’ का आयोजन किया गया।

‘स्मार्टर टुमॉरो के लिए टेक्सटाइल में इनोवेशन’ थीम पर आधारित इस कॉन्क्लेव में देशभर से आए विशेषज्ञों ने सूरत के टेक्सटाइल उद्योगपतियों को आधुनिक और भविष्य उन्मुख बिज़नेस मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में टेक्निकल टेक्सटाइल्स के बढ़ते वैश्विक महत्व, नई टेक्नोलॉजी, सरकारी नीतियों और उद्योग के भविष्य पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि डिफेंस, मेडिकल, कंस्ट्रक्शन, स्पोर्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल्स की मांग लगातार बढ़ रही है और सूरत के लिए यह एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है।

चैंबर के वाइस प्रेसिडेंट एवं प्रेसिडेंट (इलेक्ट) अशोक जीरावाला ने कहा कि टेक्निकल टेक्सटाइल्स का उपयोग विश्वभर में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के नेशनल मिशन के चलते यह सेक्टर वैश्विक स्तर पर भारतीय उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाएगा। उन्होंने उद्योगपतियों से पारंपरिक टेक्सटाइल्स से आगे बढ़कर इस इनोवेटिव सेक्टर में प्रवेश करने का आह्वान किया।

आईटीटीए के वाइस चेयरमैन डॉ. नंदन कुमार ने कहा कि देश के एमएसएमई सेक्टर को अब पॉलिमर से हाई-परफॉर्मेंस फाइबर की दिशा में आगे बढ़ना होगा। वहीं पूर्व एडिशनल टेक्सटाइल कमिश्नर एस.पी.वर्मा ने कहा कि टेक्निकल टेक्सटाइल्स में करीब 80 प्रतिशत मैन मेड फाइबर (एमएमएफ) का उपयोग होता है, जो सूरत के उद्योगपतियों के लिए एक सुनहरा अवसर है।

उन्होंने कहा कि यदि भारत हाई-एंड परफॉर्मेंस यार्न उत्पादन में सफलता हासिल करता है, तो देश टेक्निकल टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने उद्योगपतियों को “आउट ऑफ द बॉक्स” सोचने और अगले 5 से 10 वर्षों में टेक्निकल टेक्सटाइल्स की ओर डायवर्सिफिकेशन करने की सलाह दी।

डीआईसी के जनरल मैनेजर एवं जॉइंट कमिश्नर ऑफ इंडस्ट्रीज जे.बी.दवे  ने बताया कि गुजरात सरकार की टेक्सटाइल पॉलिसी में टेक्निकल टेक्सटाइल्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने उद्योगपतियों को कैपिटल सब्सिडी, पावर सब्सिडी और इंटरेस्ट सब्सिडी जैसी योजनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने यह भी कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने वाले उद्योगों को अतिरिक्त लाभ मिलेंगे और भविष्य में यूरोपियन यूनियन के कार्बन टैक्स जैसे वैश्विक मानकों को ध्यान में रखते हुए उद्योगों को अपने प्रोसेस को अपग्रेड करना होगा।

कॉन्क्लेव के दौरान चार विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें उद्योग विशेषज्ञों ने अलग-अलग विषयों पर प्रेजेंटेशन दिए।

डायवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी सेशन में वैल्यू-एडेड टेक्निकल टेक्सटाइल्स पर चर्चा हुई।
डिफेंस एप्लीकेशन सेशन में रक्षा क्षेत्र में टेक्निकल टेक्सटाइल्स की जरूरतों पर पैनल डिस्कशन आयोजित हुआ।
जियो टेक्सटाइल्स और बिल्डिंग टेक्सटाइल्स सेशन में सस्टेनेबल डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर उपयोग पर जानकारी दी गई।
स्पोर्टेक और स्टैंडर्डाइजेशन सेशन में स्पोर्ट्स टेक्सटाइल्स और क्वालिटी स्टैंडर्ड पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम के अंत में आईटीटीए के डायरेक्टर डॉ. धवल पटेल तथा एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार वासुपील्लाई ने उपस्थित अतिथियों, विशेषज्ञों और उद्योगपतियों का आभार व्यक्त किया। कॉन्क्लेव में सूरत और दक्षिण गुजरात के बड़ी संख्या में टेक्सटाइल उद्योगपति मौजूद रहे।