सूरत : महिला वकीलों ने सीनियर एडवोकेट मीनाबेन जगताप का किया सम्मान

सुप्रीम कोर्ट में महिला आरक्षण की लड़ाई लड़ने पर मिला सम्मान, गुजरात की बार संस्थाओं में महिलाओं को 30% प्रतिनिधित्व का रास्ता हुआ मजबूत

सूरत : महिला वकीलों ने सीनियर एडवोकेट मीनाबेन जगताप का किया सम्मान

सूरत। लीगल प्रोफेशन में महिला आरक्षण को लेकर लंबे समय से संघर्ष करने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाबेन जगताप का सूरत की महिला वकीलों द्वारा सम्मान किया गया।

महिला वकीलों को बार एसोसिएशन और बार काउंसिल में प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति चिन्ह और गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में महिला अधिवक्ताओं ने कहा कि मीनाबेन जगताप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महिला वकीलों के लिए आरक्षण की मांग उठाई थी, जिसके बाद महिलाओं को गुजरात की बार संस्थाओं में प्रतिनिधित्व मिलने का रास्ता खुला।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गुजरात के विभिन्न जिला बार एसोसिएशन में महिलाओं को एलआर, ट्रेज़रर और काउंसिल मेंबर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर स्थान मिला है। साथ ही गुजरात बार काउंसिल में भी महिला आरक्षण को मंजूरी मिली है।

इस अवसर पर सूरत बार काउंसिल की सदस्य प्रीति जोशी, हीरल पानवाला, भारती मुखर्जी, बार एसोसिएशन की एलआर फनी पटेल, ट्रेज़रर दिव्या कोसंबिया, राजेश्वरी शुक्ला, हीना घिमर, कीर्तन साल्वे और नीता त्रिवेदी समेत बड़ी संख्या में महिला अधिवक्ता मौजूद रहीं।

कार्यक्रम में अधिवक्ता प्रीति जोशी ने कहा कि महिला वकीलों के हितों को ध्यान में रखते हुए मीनाबेन जगताप ने जो संघर्ष किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है।

उन्होंने कहा कि अब महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलने लगे हैं और इससे न्याय व्यवस्था में उनकी भागीदारी और मजबूत होगी।

अपने संबोधन में मीनाबेन जगताप ने कहा कि महिलाओं का संघर्ष जन्म से ही शुरू हो जाता है और उन्हें जीवनभर अपने अस्तित्व और सम्मान के लिए लड़ना पड़ता है। उन्होंने महिला वकीलों से आत्मसम्मान की रक्षा के लिए हमेशा सजग और संगठित रहने का आह्वान किया।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने हाल ही में गुजरात हाई कोर्ट और जिला बार एसोसिएशनों में ट्रेज़रर सहित एग्जीक्यूटिव कमेटी के 30 प्रतिशत पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि महिला वकीलों को समान प्रतिनिधित्व देने के मामले में अन्य राज्यों की तर्ज पर गुजरात में भी सकारात्मक कदम उठाना जरूरी है।

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