सूरत : राजस्थान पुलिस का मेगा ऑपरेशन, 84 आदिवासी बाल मजदूरों को फैक्ट्रियों से छुड़ाया
उदयपुर AHTU और स्टेट चाइल्ड कमीशन की संयुक्त कार्रवाई, 7 से 14 साल के बच्चों से करवाई जा रही थी खतरनाक मजदूरी
सूरत। सूरत के कपड़ा उद्योग में चल रहे बाल मजदूरी के बड़े नेटवर्क का राजस्थान पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बुधवार, 13 मई को सूरत के पुणा क्षेत्र में छापेमारी कर 84 आदिवासी बच्चों को मुक्त कराया। ये सभी बच्चे राजस्थान के उदयपुर जिले के आदिवासी इलाकों से लाए गए थे और उनसे बेहद कम मजदूरी पर फैक्ट्रियों में काम कराया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार, राजस्थान से आई करीब 20 सदस्यीय टीम ने पहले से तैयार योजना के तहत पुणा पुलिस के सहयोग से सीताराम सोसाइटी, मुक्तिधाम सोसाइटी समेत छह अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की। पिछले एक महीने से टीमें बाल मजदूरी से जुड़े नेटवर्क पर नजर रखे हुए थीं।
जांच में सामने आया कि 7 से 14 वर्ष की उम्र के इन बच्चों से साड़ियों में धागा काटने, कपड़ा यूनिटों में मशीनें चलाने और अन्य जोखिमभरे काम करवाए जा रहे थे। बच्चों को पूरे दिन फैक्ट्री के धुएं, गर्मी और शोरगुल के बीच काम करना पड़ता था। इसके बदले उन्हें मात्र 5 से 8 हजार रुपये मासिक दिए जाते थे।
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि एजेंट गरीबी का फायदा उठाकर इन बच्चों को कुछ महीने पहले सूरत लेकर आए थे। बचाए गए अधिकांश बच्चे स्कूल छोड़ चुके थे और आर्थिक मजबूरी के कारण मजदूरी करने को विवश थे।
अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2019 में भी इसी प्रकार की कार्रवाई में उदयपुर क्षेत्र के कई बच्चों को सूरत से मुक्त कराया गया था। इसके बावजूद बच्चों को मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में भेजे जाने का सिलसिला जारी है, जो गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
फिलहाल पुलिस फैक्ट्री संचालकों और एजेंटों से पूछताछ कर रही है। राजस्थान पुलिस बच्चों के परिजनों से भी संपर्क कर रही है। सभी बच्चों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बस के माध्यम से राजस्थान भेज दिया गया है।
इस कार्रवाई में गायत्री सेवा संस्थान (जीएसएस) सहित राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर), एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, राजस्थान के 22 पुलिस अफसरों, सूरत के पूना थाने के अफसरों के साथ नागरिक समाज संगठन एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) भी शामिल थे।
