राजकोट : महिला सहायता केंद्र की पहल से दिव्यांग विधवा महिला को मिला पेंशन का अधिकार

काउंसलरों की समझाइश और प्रयासों से मिले जरूरी दस्तावेज, अब सरकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ

राजकोट : महिला सहायता केंद्र की पहल से दिव्यांग विधवा महिला को मिला पेंशन का अधिकार

राज्य सरकार द्वारा महिला पुलिस स्टेशनों में शुरू किए गए महिला सहायता केंद्र (PBSC) जरूरतमंद और पीड़ित महिलाओं के लिए राहत का माध्यम बनते जा रहे हैं। राजकोट से सामने आई एक प्रेरणादायक घटना ने एक बार फिर इन केंद्रों की उपयोगिता को साबित किया है। महिला पुलिस स्टेशन स्थित महिला सहायता केंद्र की काउंसलरों की मदद से एक दिव्यांग विधवा महिला को आखिरकार विधवा पेंशन का अधिकार मिल सका।

इस संबंध में जानकारी देते हुए काउंसलर शिल्पाबेन परमार और दक्षाबेन चांदलिया ने बताया कि पीड़ित महिला की शादी करीब 23 वर्ष पहले हुई थी और उसका एक 18 वर्षीय पुत्र भी है। लगभग छह वर्ष पहले उसके पति का निधन हो गया था, जिसके बाद महिला पूरी तरह असहाय हो गई। इसी दौरान उसे आंखों में रक्त के थक्के जमने की गंभीर बीमारी हुई, जिससे धीरे-धीरे उसकी देखने और सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो गई। डॉक्टरों ने इस बीमारी को लाइलाज बताया।

परिवार की परिस्थितियां भी महिला के लिए चुनौतीपूर्ण थीं। ससुराल पक्ष के सदस्य वरिष्ठ नागरिक होने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण उसकी देखभाल करने में असमर्थ थे। ऐसे में दो वर्ष पहले महिला को उसके मायके पक्ष के पास रहने के लिए भेज दिया गया था।

आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए महिला को पति के मृत्यु प्रमाणपत्र सहित कई जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता थी। मायके पक्ष द्वारा कई बार ससुराल वालों से दस्तावेज मांगे गए, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से उन्हें टाल दिया गया। आखिरकार परेशान होकर पीड़ित महिला ने राजकोट महिला पुलिस स्टेशन के महिला सहायता केंद्र से संपर्क किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला सहायता केंद्र की काउंसलरों ने तुरंत कार्रवाई की। ससुराल पक्ष को केंद्र में बुलाकर दोनों पक्षों के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें आयोजित की गईं। काउंसलरों ने कानूनी प्रावधानों और मानवीय संवेदनाओं का हवाला देते हुए ससुराल पक्ष को समझाने का प्रयास किया।

लगातार समझाइश के बाद ससुराल पक्ष को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने महिला को आधार कार्ड, राशन कार्ड, मृत्यु प्रमाणपत्र समेत सभी जरूरी दस्तावेज सौंपने पर सहमति जताई। दस्तावेज मिलने के बाद अब महिला विधवा पेंशन योजना और अन्य सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेगी।

मामले के सकारात्मक समाधान के बाद काउंसलर शिल्पाबेन ने कहा कि महिला सहायता केंद्र का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग, बेसहारा और पीड़ित महिलाओं को उनके अधिकार दिलाना और उन्हें सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सही संवाद और समझाइश के जरिए पारिवारिक विवादों को सुलझाकर पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सकता है।

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