15 मई से पहले महंगा होगा पेट्रोल-डीजल! दबाव में सरकार और तेल कंपनियां, हर लीटर पर ₹30 तक का अतिरिक्त बोझ
मुंबई, 09 मई (वेब वार्ता)। क्रूड ऑयल की कीमते ऑल टाइम हाई पर पहुंचने के बाद सरकार और तेल कंपनियां पेट्रोल पर 24 रुपये और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक का अतिरिक्त बोझ खुद उठा रही थीं।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है। इसी बीच ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। जो कि 15 मई से पहले होने की आशंका है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान-इजरायल और अमेरिका में जारी तनाव को लेकर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर भारी आर्थिक दवाब बन गया है।
मामले से जानकार सूत्रों का कहना है कि, तेल कंपनियों को हर महीने लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर से उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। हालांकि, इस तेजी के बाद भी भारत में अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
15 मई से पहले महंगा होगा पेट्रोल-डीजल
बताया जा रहा है कि सरकार और तेल कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर तक का एक्स्ट्रा बोझ उठा रही हैं, ताकि ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा जाए और आम आदमी पर महंगाई का ज्याद असर न दिखें।
हालांकि, तेजी से बढ़ते कच्चे तेल की कीमतों के बीच अब पेट्रोल और डीजल के कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो 15 मई से पहले कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
40 से 50% तक ईंधन हुआ महंगा
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में पैदा हुए संकट ने ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट को भारी नुकसान पहुंचाया है। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में 126 डॉलर प्रति बैरल तक की उछाल के बावजूद भी भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है।
हालांकि, यह राहत अब ज्यादा लंबी नहीं चल सकती है। बिजनेस टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 मई से पहले पेट्रोल और डीजल के लिए आम लोगों को अधिक खर्च करना पड़ सकता है। भारत को छोड़कर एशिया के सभी देश में ईंधन 40-50% तक महंगा हो चुके हैं।
हर महीने 30 हजार करोड़ का नुकसान
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, क्रूड ऑयल की कीमते ऑल टाइम हाई पर पहुंचने के बाद सरकार और तेल कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक का अतिरिक्त बोझ खुद उठा रही थीं।
एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद भी इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
भारत ने बढ़ाया कच्चे तेल का आयात
भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से क्रूड ऑयल का इंपोर्ट बढ़ाकर सप्लाई को स्थिर बनाए रखा। बताया जा रहा है कि देश की रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से ज्यादा क्षमता पर काम कर रही हैं, ताकि ईंधन की उपलब्धता बाधित न हो।
अधिकारियों ने बताया है कि पिछले एक दशक में ऊर्जा ढांचे के विस्तार ने भी भारत को इस संकट से बेहतर तरीके से निपटने में मदद की है।
