सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर कमर्शियल LPG महंगाई का बड़ा झटका

रु.993 की बढ़ोतरी से बढ़ी उत्पादन लागत, प्रोसेसिंग यूनिट्स और सिंथेटिक सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर कमर्शियल LPG महंगाई का बड़ा झटका

सूरत के प्रमुख टेक्सटाइल उद्योग को कमर्शियल LPG सिलेंडर में हाल ही में हुई रु.993 की भारी बढ़ोतरी ने गहरे संकट में डाल दिया है। पहले से ही वैश्विक ऊर्जा महंगाई और कमजोर मांग से जूझ रहे इस उद्योग पर अब अतिरिक्त लागत का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। यह कहना है टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े गिरधर गोपाल मूंदड़ा का। 

उन्होंने कहा कि एलपीजी बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर शहर के डाइंग, प्रिंटिंग और प्रोसेसिंग सेक्टर पर देखने को मिल रहा है, जो ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भर हैं। LPG की कीमत बढ़ने से प्रति मीटर और प्रति किलो प्रोसेसिंग लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई यूनिट्स ने उत्पादन कम कर दिया है, जबकि कुछ ने अस्थायी रूप से संचालन बंद करना भी शुरू कर दिया है।

इस बढ़ोतरी का असर केवल उत्पादन लागत तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रमिकों पर भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है। जीवन-यापन की बढ़ती लागत के कारण मजदूरों का पलायन बढ़ रहा है, जिससे उद्योग में श्रमिकों की कमी देखने को मिल रही है। इसका सीधा असर उत्पादन क्षमता पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सूरत का मुख्य सिंथेटिक (MMF) सेक्टर इस समय दोहरे दबाव में है। एक तरफ कच्चा माल, जो क्रूड ऑयल पर आधारित है, महंगा हो गया है, वहीं दूसरी ओर LPG की बढ़ी कीमतों ने प्रोसेसिंग लागत को और बढ़ा दिया है। इसके मुकाबले कॉटन सेक्टर पर असर अपेक्षाकृत कम है, हालांकि प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्ट और डाइंग की लागत बढ़ने से यह भी पूरी तरह अछूता नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि यार्न और प्रोसेसिंग दोनों की लागत बढ़ने से आने वाले समय में कपड़ों की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। हालांकि, फिलहाल कमजोर मांग, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सुस्ती और स्थानीय स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते उद्योग तुरंत यह बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रहा है।

निकट भविष्य में उद्योग को खुद ही इस बढ़ी हुई लागत का सामना करना पड़ेगा, जिससे मुनाफे पर असर पड़ना तय है। अगले कुछ महीनों में प्रोसेसिंग चार्ज में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बाद साड़ी, ड्रेस मटेरियल और रेडीमेड गारमेंट्स की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है, खासकर सिंथेटिक उत्पादों में।

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