सूरत : कैट ने आरबीआई के पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस कैंसिल करने के फैसले का स्वागत किया

ग्राहकों और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा पर ज़ोर, डेटा सिक्योरिटी मामलों की गहन जांच की मांग

सूरत : कैट ने आरबीआई के पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस कैंसिल करने के फैसले का स्वागत किया

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। संगठन ने इसे आम जनता के हित में उठाया गया एक महत्वपूर्ण और आवश्यक कदम बताया है।

कैट का कहना है कि इस सख्त नियामकीय कार्रवाई से उन लाखों भारतीयों की जमा पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिन्होंने इस संस्थान पर भरोसा जताते हुए अपना पैसा इसमें रखा था। संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि वित्तीय संस्थानों के लिए नियमों का पालन सर्वोपरि होना चाहिए।

कैट गुजरात के चेयरमैन प्रमोद भगत ने कहा कि RBI का यह निर्णय बार-बार नियमों के उल्लंघन, प्रबंधन की कमियों और केंद्रीय बैंक के निर्देशों की लगातार अनदेखी की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में RBI ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक की बैंकिंग गतिविधियों पर व्यापक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद संस्थान आवश्यक सुधार लागू करने में विफल रहा।

संगठन ने RBI द्वारा जमाकर्ताओं को दिए गए इस आश्वासन की सराहना की कि उनका पैसा सुरक्षित रहेगा और नियमानुसार वापस किया जाएगा। कैट के अनुसार यह भरोसा विशेष रूप से छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं, स्वरोज़गार से जुड़े लोगों और महिला उद्यमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो दैनिक लेनदेन के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। कैट ने यह भी कहा कि डिजिटल भुगतान आधुनिक व्यापार व्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं का विश्वास बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

RBI के इस कदम से स्पष्ट संदेश जाता है कि कोई भी संस्था, चाहे उसका आकार या बाजार में प्रभाव कितना ही बड़ा क्यों न हो, उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी या नियामकीय नियमों के उल्लंघन के साथ कार्य नहीं कर सकती। प्रमोद भगत ने दोहराया कि वित्तीय नवाचार को पारदर्शिता, जवाबदेही और भारतीय कानूनों के पूर्ण पालन के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें उपभोक्ताओं और व्यापारियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

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