सूरत :'कमाऊ' पति की बहानेबाजी नहीं आई काम, कोर्ट ने बेरोजगार होने का दावा करने वाले पति को दिया दस हजार भरण-पोषण का आदेश
आमदनी छिपाने वाले पति की पोल खुली, बारडोली फैमिली कोर्ट ने प्रताड़ित पत्नी के पक्ष में सुनाया फैसला
सूरत। सूरत जिले में बारडोली तहसिल की फ़ैमिली कोर्ट ने पत्नी को छोड़कर आय छिपाने वाले पति को हर महीने ₹10,000 भरण-पोषण (मेंटेनेंस) देने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने आवेदन खर्च के रूप में ₹6,000 अलग से देने के निर्देश भी दिए हैं।
मामले के अनुसार, बारडोली निवासी पीड़िता की शादी वर्ष 2003 में मुंबई निवासी व्यक्ति से हुई थी। शादी के शुरुआती समय में दंपति का जीवन सामान्य रहा, लेकिन बाद में पति और ससुराल पक्ष द्वारा कथित तौर पर उत्पीड़न शुरू हो गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, दहेज की मांग की गई और अंततः वर्ष 2021 में उसे घर से निकाल दिया गया।
पीड़िता के अनुसार, पति द्वारा खर्च के लिए पर्याप्त राशि नहीं दी जाती थी, जबकि वह स्वयं होटल, ब्रोकरेज व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। इसके बाद महिला ने अपने भरण-पोषण के लिए बारडोली अदालत में याचिका दायर की, जिसे बाद में बारडोली फैमिली कोर्ट में स्थानांतरित किया गया।
सुनवाई के दौरान पति ने खुद को बेरोजगार बताते हुए आय न होने का दावा किया। हालांकि, पत्नी की ओर से पेश साक्ष्यों में यह सामने आया कि पति रियल एस्टेट ब्रोकरेज से जुड़ा है और उसके पास आय के पर्याप्त स्रोत हैं।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों से स्पष्ट है कि पति ने पत्नी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर अलग किया और पर्याप्त साधन होने के बावजूद उसका भरण-पोषण नहीं किया।
एडिशनल जज वी.एस. गढ़वी ने मामले में फैसला सुनाते हुए पति को निर्देश दिया कि वह आवेदन की तारीख से पत्नी को हर महीने ₹10,000 भरण-पोषण के रूप में अदा करे।
इस मामले में पीड़िता की ओर से अधिवक्ता प्रीति जिग्नेश जोशी ने पैरवी की। अदालत के इस फैसले को घरेलू हिंसा और परित्याग के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
