सूरत : उधना रेलवे स्टेशन पर भगदड़ जैसे हालात, बेकाबू भीड़ पर पुलिस का लाठीचार्ज
लंबी कतारों और ट्रेनों की कमी से बढ़ा तनाव, पानी की किल्लत ने हालात किए और खराब
सूरत। सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब भारी भीड़ और अव्यवस्था के कारण भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए। हालात इतने बिगड़ गए कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
गर्मी की छुट्टियों, शादियों के सीजन और एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण फैक्ट्रियों में छुट्टियां घोषित होने के चलते बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों की ओर लौटने के लिए स्टेशन पर पहुंचे। लेकिन यात्रियों की संख्या के मुकाबले ट्रेनों की कमी के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, स्टेशन के बाहर यात्रियों की कतार 3 से 5 किलोमीटर तक लंबी हो गई थी। हजारों लोग घंटों तक भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहे। लंबे इंतजार और भीषण गर्मी के कारण कई यात्रियों का धैर्य टूट गया और कुछ लोग बाउंड्री फांदकर स्टेशन परिसर में घुसने लगे, जिससे भगदड़ जैसे हालात बन गए।
भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान हल्का लाठीचार्ज भी किया गया। अत्यधिक गर्मी और भीड़भाड़ के चलते दो यात्री बेहोश हो गए, जिन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया।
स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह रही कि स्टेशन पर पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। जब प्रशासन की ओर से पानी उपलब्ध कराया गया, तो प्यासे यात्रियों के बीच बोतलों के लिए छीना-झपटी तक देखने को मिली।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 7000 से अधिक यात्रियों की भीड़ के लिए 2 ट्रेनें उपलब्ध थीं, जिससे अव्यवस्था और बढ़ गई। इस बीच एक भावुक दृश्य भी सामने आया, जहां एक युवक अपनी पत्नी की अस्थियां लेकर घंटों ट्रेन में चढ़ने के लिए संघर्ष करता रहा।
रेलवे अधिकारी अनुभव सक्सेना ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं और अब तक छह ट्रेनें रवाना की जा चुकी हैं। वहीं रेलवे के डीवायएसपी दीपक गौड़ ने कहा कि यात्रियों की संख्या अपेक्षा से अधिक है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यात्रियों का आरोप है कि हर साल ऐसी भीड़ के बावजूद रेलवे प्रशासन पर्याप्त पूर्व योजना बनाने में विफल रहता है। कई यात्रियों ने बताया कि 16 घंटे तक लाइन में खड़े रहने के बाद भी उन्हें ट्रेन में जगह नहीं मिल सकी, जिसके चलते उन्हें मजबूरन नियम तोड़कर अंदर जाना पड़ा।
फिलहाल प्रशासन ने अतिरिक्त व्यवस्था करने और भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं, लेकिन हालात ने रेलवे की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
