सूरत : ब्रेईन डेड अशोकभाई डोंडा के अंगों के दान से 7 लोगों को मिला नया जीवन
आखिरी पलों में लिया गया फैसला बना जीवनदान,डोंडा परिवार ने पेश की प्रेरणादायक मिसाल
सूरत। मोटा वराछा स्थित आवकार रेजीडेंसी निवासी 55 वर्षीय अशोकभाई नानूभाई डोंडा को चिकित्सकों ने ब्रेनडेड घोषित करने पर परिवारजनों ने अंतिम क्षणों में अंगदान का एक ऐसा निर्णय लिया, जिसने सात लोगों को नई जिंदगी दे दी। उनके इस मानवीय कदम ने समाज के सामने सेवा और त्याग की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।
जानकारी के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 को अशोकभाई अपनी पत्नी रेखाबेन के इलाज के बाद अहमदाबाद से सूरत लौटे थे। दोपहर करीब 2:30 बजे घर पर अचानक अशोकभाई की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत पी.पी. सवाणी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने गहन उपचार के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
इस कठिन समय में जीवनदीप ऑर्गन डोनेशन फाउंडेशन ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने परिवार को ऑर्गन डोनेशन के महत्व के बारे में समझाया। परिवार ने साहस और संवेदनशीलता दिखाते हुए अंगदान के लिए सहमति दी। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर SOTO टीम से समन्वय स्थापित किया गया।
अशोकभाई के अंगों का सफल प्रत्यारोपण विभिन्न अस्पतालों में किया गया। उनका हृदय अहमदाबाद के यू.एन. मेहता हॉस्पिटल, फेफड़े केडी हॉस्पिटल, जबकि लीवर और दोनों किडनी IKDRC अस्पताल में प्रत्यारोपित किए गए। इसके अलावा, उनकी आंखें लोकदृष्टि चक्षु बैंक को दान की गईं। इस प्रकार कुल सात मरीजों को नया जीवन मिला।
अंगों को समय पर विभिन्न अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए गुजरात पुलिस द्वारा तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए, जिससे सूरत से अहमदाबाद तक ट्रांसपोर्टेशन तेज और सुरक्षित हो सका। इस पूरी प्रक्रिया में एयरपोर्ट अथॉरिटी और चिकित्सा टीमों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
जीवनदीप ऑर्गन डोनेशन फाउंडेशन ट्रस्ट और पी.पी. सवाणी हॉस्पिटल के संयुक्त प्रयासों से यह 32वां सफल अंगदान संपन्न हुआ। अशोकभाई डोंडा और उनके परिवार का यह निर्णय न केवल सात जिंदगियों को रोशन कर गया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि “ऑर्गन डोनेशन सबसे श्रेष्ठ दान है।”
