अमेरिका-ईरान युद्ध के 32वें दिन ट्रंप की खार्ग द्वीप तबाह करने की खुली धमकी

लेबनान में धमाके के दौरान तीन यूएन शांति सैनिकों की मौत से दुनिया में हड़कंप

अमेरिका-ईरान युद्ध के 32वें दिन ट्रंप की खार्ग द्वीप तबाह करने की खुली धमकी

तेहरान/वाशिंगटन, 31 मार्च (वेब वार्ता)। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध अब अपने पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, जिसमें शांति के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से चर्चा के दौरान ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘खार्ग द्वीप’ को पूरी तरह मटियामेट कर देगा।

इस बीच, लेबनान में हुए एक शक्तिशाली धमाके में संयुक्त राष्ट्र (UN) के तीन शांति सैनिकों की मौत हो गई है, जिसके बाद फ्रांस ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने का आह्वान किया है। युद्ध के 32वें दिन भी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तबाही मचा रखी है।

क्षेत्र में शांति बहाली के लिए पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता की कोशिशें तेज हो गई हैं। पाकिस्तान में कई देशों के विदेश मंत्रियों ने अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए मंथन किया, जिसका चीन ने भी पुरजोर समर्थन किया है।

हालांकि, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने इन वार्ताओं को ‘दिखावा’ करार देते हुए खारिज कर दिया है। ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेना जमीन पर अमेरिकी सैनिकों का इंतजार कर रही है ताकि उन्हें करारा जवाब दिया जा सके।

तेहरान ने वाशिंगटन के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत की खबरों का खंडन करते हुए अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया है।

युद्ध की आग अब कुवैत और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तक फैल चुकी है। ईरान ने कुवैत के महत्वपूर्ण जल और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया है, जिससे क्षेत्र में मानवीय संकट गहरा गया है।

दूसरी ओर, ट्रंप ने दावा किया कि ईरान सम्मान के प्रतीक के तौर पर होर्मुज से 20 तेल टैंकरों को गुजरने देने पर सहमत हो गया है। बावजूद इसके, खार्ग द्वीप पर अमेरिकी कब्जे की धमकी ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रणनीतिक द्वीप युद्ध की भेंट चढ़ता है, तो यह एक लंबे और विनाशकारी वैश्विक आर्थिक संकट को जन्म दे सकता है, जिसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर भारी दबाव है।