सूरत : खजोद डंपिंग साइट पर दूसरे दिन भी धधकती आग, कचरा निपटान पर उठे गंभीर सवाल
नए कॉन्ट्रैक्टर के अभाव में फर्जी एजेंसी को काम सौंपने का आरोप, आग के पीछे साज़िश और भ्रष्टाचार की जांच की मांग तेज
सूरत। शहर की खजोद डंपिंग साइट पर कचरे में लगी आग लगातार दूसरे दिन भी जारी रहने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आग पर काबू पाने में हो रही देरी के बीच कचरा निपटान प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि सूरत नगर निगम का 213 करोड़ रुपये का कचरा निपटान कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद नया ठेकेदार नियुक्त नहीं किया गया। इसके चलते अगले 10 महीनों के लिए यह काम कथित रूप से एक फर्जी एजेंसी को सौंपे जाने के आरोप सामने आए हैं। इसी बीच, पिछले 52 दिनों में दूसरी बार आग लगने से घटना को लेकर संदेह गहरा गया है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि आग प्राकृतिक रूप से लगी या फिर जानबूझकर लगाई गई। इस बीच खजोद कचरा घोटाले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जांच की रफ्तार धीमी बताई जा रही है, जबकि आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
मामले में यह भी सामने आया है कि वापी की एक एजेंसी द्वारा कचरे के वैज्ञानिक निपटान के बजाय उसे अन्य स्थानों पर डंप किया जा रहा था, जिससे कथित घोटाले का खुलासा हुआ था। इस घटना से सूरत नगर निगम की छवि को नुकसान पहुंचा है और जांच प्रक्रिया ठंडी पड़ने के आरोप लग रहे हैं।
आग की घटना को लेकर नगर निगम आयुक्त से लेकर राज्य के उच्च स्तर तक शिकायतें की गई हैं। शिकायत में मांग की गई है कि आग लगने के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, वायु प्रदूषण को रोकने के उपाय किए जाएं, लापरवाह ठेकेदारों पर जुर्माना लगाकर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा पूरे मामले की पुलिस जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कचरे में लगी आग के जरिए भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने की कोशिश की गई हो सकती है। इसके साथ ही, डंपिंग साइट पर सीसीटीवी कैमरों की जांच के आधार पर सच्चाई सामने लाने की मांग भी दोहराई गई है।
लगातार जल रहे कचरे से उठ रहे धुएं के कारण आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। AQI बढ़ने से लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मामले में यह भी मांग की गई है कि गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) द्वारा साइट पर प्रदूषण मापने के उपकरण लगाए जाएं और स्थिति पर निगरानी रखी जाए।
वहीं, कुछ बिचौलियों द्वारा ठेकेदार के लंबित बिल पास करवाने के प्रयासों के आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे में नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
