सूरत : खाड़ी क्षेत्र के तनाव का असर, कच्चे माल और फ्यूल की कमी पर चैंबर ने केंद्र-राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग
सूरत समेत दक्षिण गुजरात की इंडस्ट्रीज़ पर बढ़ता दबाव, नैचुरल गैस-LNG की निर्बाध सप्लाई और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने की अपील
सूरत। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और शिपिंग रूट्स में आ रही बाधाओं के कारण कच्चे माल और औद्योगिक ईंधन की सप्लाई चेन पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।
चैंबर ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी, वित्त मंत्री कनुभाई देसाई तथा सूरत के जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट डॉ. सौरभ पारधी को ज्ञापन भेजकर इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
चैंबर के अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने कहा कि भारत के औद्योगिक क्षेत्र का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात किए जाने वाले कच्चे माल, पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG), क्रूड ऑयल और अन्य आवश्यक संसाधनों पर निर्भर है। मौजूदा जियो-पॉलिटिकल परिस्थितियों और शिपिंग मार्गों में रुकावटों के कारण इन संसाधनों की उपलब्धता और कीमतों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उद्योगों के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
सूरत और दक्षिण गुजरात की उद्योग इकाइयां—खासकर टेक्सटाइल, केमिकल, पेट्रोकेमिकल, सिरेमिक, इंजीनियरिंग, स्टील री-रोलिंग, प्लास्टिक और MSME सेक्टर—नैचुरल गैस और अन्य औद्योगिक ईंधन की संभावित कमी, क्रूड ऑयल डेरिवेटिव्स और पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की बढ़ती कीमतों, आयातित कच्चे माल की सप्लाई में बाधा तथा वैश्विक अनिश्चितता के कारण बढ़ती फ्रेट और लॉजिस्टिक्स लागत जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
इन परिस्थितियों के चलते कई औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने लगा है और संचालन लागत भी बढ़ रही है। विशेष रूप से गैस आधारित उद्योगों पर इसका असर अधिक दिखाई दे रहा है। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो इससे क्षेत्र के निर्यात, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
चैंबर ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि उद्योगों को नैचुरल गैस और LNG की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक सोर्सिंग की व्यवस्था की जाए। साथ ही कच्चे माल और औद्योगिक ईंधन की कमी से जूझ रहे उद्योगों को राहत देने के लिए नीति स्तर पर कदम उठाए जाएं।
चैंबर ने यह भी सुझाव दिया है कि आवश्यक औद्योगिक इकाइयों को सप्लाई सुचारू रखने के लिए आयात और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया जाए तथा जरूरी औद्योगिक ईंधन और कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि MSME सेक्टर को विशेष सहायता देने की जरूरत है, क्योंकि अचानक सप्लाई में रुकावट से यह वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होता है। साथ ही ईंधन आपूर्ति करने वाली संस्थाओं और कच्चे तेल आधारित उत्पादों के सप्लायर्स को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे नैतिक व्यापार मानकों का पालन करें और इस संवेदनशील समय में किसी भी तरह की मुनाफाखोरी या सट्टेबाजी से बचें।
चैंबर ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उद्योग जगत ने हमेशा भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और आर्थिक विकास के मिशन का समर्थन किया है। ऐसे में सरकार से अपेक्षा है कि वह मौजूदा परिस्थितियों में समय पर हस्तक्षेप कर उद्योगों को राहत प्रदान करे, ताकि उत्पादन, निर्यात और रोजगार की गतिविधियां बिना बाधा जारी रह सकें।
