सूरत : सचिन जीआईडीसी में मजदूरों का पलायन रोकने की कोशिश तेज, कुकिंग गैस संकट के बीच कमर्शियल सिलेंडर की मांग

इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, गैस की कमी और ब्लैक मार्केटिंग से जूझ रहे मजदूरों के लिए राहत की मांग

सूरत : सचिन जीआईडीसी में मजदूरों का पलायन रोकने की कोशिश तेज, कुकिंग गैस संकट के बीच कमर्शियल सिलेंडर की मांग

सूरत। सूरत के सचिन जीआईडीसी क्षेत्र में डाइंग और प्रिंटिंग मिलों में काम करने वाले मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए इंडस्ट्रियल एसोसिएशन सक्रिय हो गई है। सूरत जिला कलेक्टर और सचीन जीआईडीसी पुलिस इंस्पेक्टर को ज्ञापन देकर कमर्शियल सिलेंडर तथा कुकिंग गैस के कालाबाजीरी रोकने की मांग की गई।

कुकिंग गैस की गंभीर कमी के चलते मजदूरों के सामने रोज़मर्रा का खाना बनाना मुश्किल हो गया है, जिसके कारण उनके अपने वतन लौटने का खतरा बढ़ गया है।

सचिन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशोर बी. पटेल और सेक्रेटरी मयूर जे. गोलवाला ने इस संबंध में सूरत जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया है कि सचिन इंडस्ट्रियल एस्टेट में करीब 60 डाइंग और प्रिंटिंग मिलें संचालित हो रही हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मजदूर कार्यरत हैं।

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते गैस सप्लाई बाधित हुई है, जिससे एलपीजी कुकिंग गैस सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है। इसके चलते मजदूरों के लिए खाना बनाना कठिन हो गया है।

एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि मिल मालिकों को मजदूरों के लिए खाना बनाने हेतु कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं और इसके उपयोग की निगरानी के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।

इस बीच, कुछ मिल मालिकों ने अपने स्तर पर समाधान निकालने की कोशिश शुरू कर दी है। सचिन जीआईडीसी के एक प्लॉट पर स्थित रुद्राक्ष मिल में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाकर मजदूरों को परोसा जा रहा है। अन्य मिल मालिक भी इसी तरह की व्यवस्था करने पर विचार कर रहे हैं।

गैस की किल्लत के साथ-साथ ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। 14 मार्च को मजदूरों और स्थानीय लोगों ने इस समस्या को लेकर प्रशासन और पुलिस से शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने कुछ जगहों पर छापेमारी भी की। इसके बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ पाए हैं।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सचिनजीआईडीसी पुलिस स्टेशन के PI कुलदीप सिंह गोहिल से मुलाकात कर गैस की ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

साथ ही यह भी बताया गया कि कई मजदूरों को मजबूरी में इलेक्ट्रिक स्टोव पर खाना बनाना पड़ रहा है, जिससे बिजली खर्च बढ़ रहा है। चूंकि किराए में बिजली का खर्च शामिल नहीं है, इसलिए मकान मालिक भी इसका विरोध कर रहे हैं।

ऐसे हालात में इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने प्रशासन से अपील की है कि मजदूरों के हित में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि उन्हें राहत मिल सके और उद्योगों में कामकाज प्रभावित न हो।

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