सूरत में राजस्थानी संस्कृति की छटा: सुथार समाज की महिलाओं ने धूमधाम से मनाया गणगौर उत्सव

शिव-पार्वती के प्रेम के प्रतीक पर्व पर गूँजे ईशर जी के गीत; पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने निकाला 'बंदोरा'

सूरत में राजस्थानी संस्कृति की छटा: सुथार समाज की महिलाओं ने धूमधाम से मनाया गणगौर उत्सव

सूरत। शहर में बसने वाले राजस्थानी प्रवासियों के लिए गणगौर केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का संगम है। इसी कड़ी में शनिवार, 14 मार्च को श्री राजस्थान विश्वकर्मा मंडल (सुथार समाज) सूरत के महिला मंडल द्वारा गणगौर उत्सव का भव्य आयोजन किया गया।

अखंड सौभाग्य की कामना और लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर इस उत्सव ने सूरत में राजस्थान की जीवंत झलक पेश की।

उत्सव के दौरान सुथार समाज की महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधानों और आभूषणों में सजी-धजी नज़र आईं। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ईशर भगवान का बंदोरा रहा, जिसमें महिलाओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य करते हुए खुशियाँ मनाईं।

भगवान शिव (ईशर) और माता पार्वती (गौरा) की पूजा-अर्चना कर महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का वरदान माँगा।

इस उत्सव को सफल बनाने में समाज के महिला मंडल का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में हेमल, उर्मिला, मनीषा, सुंदर, नीतू, सपना, संगीता, रेखा, ईशु, सुनीता, जसोदा, मनीषा, भक्ति और सरोज सहित बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने मिलकर राजस्थानी लोक गीतों और घूमर नृत्य के साथ वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि गणगौर का त्यौहार नारी शक्ति और समर्पण का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से न केवल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलता है, बल्कि प्रवासी समाज के बीच आपसी मेल-मिलाप भी बढ़ता है।

समारोह के अंत में सामूहिक प्रसाद का आयोजन किया गया, जहाँ समाज की महिलाओं ने एक-दूसरे को गणगौर पर्व की बधाई दी।

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