सूरत : मिडिल ईस्ट युद्ध का असर सूरत के उद्योगों पर, केमिकल के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़े

उद्योग जगत को संयम और सहयोग के साथ चुनौतियों का सामना करना होगा : गुलाब सिंह राजपूत

सूरत : मिडिल ईस्ट युद्ध का असर सूरत के उद्योगों पर, केमिकल के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़े

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब भारत के उद्योग जगत पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर सूरत के टेक्सटाइल और केमिकल उद्योग पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। जहां एक ओर डीजल, पेट्रोल, एलपीजी और सीएनजी की संभावित कमी को लेकर लोगों में चिंता का माहौल है, वहीं केमिकल की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी और आपूर्ति में कमी ने टेक्सटाइल उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके साथ ही यार्न और जरी के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि मौजूदा अनिश्चितता के माहौल में श्रमयोगियों के पलायन का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

इस संदर्भ में टेक्सटाइल और केमिकल उद्योग से जुड़े उद्योगपति गुलाब सिंह राजपूत ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियां काफी चिंताजनक हैं, लेकिन उद्योग जगत को संयम और सहयोग के साथ इन चुनौतियों का सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि उद्योग से जुड़े सभी व्यापारियों को एक-दूसरे के सहयोग से उद्योग को मजबूती देने का समय आ गया है। साथ ही सरकार को भी ऐसी प्रभावी औद्योगिक नीतियां बनानी चाहिए, जिससे उद्योग और व्यापार प्रभावित न हों।

राजपूत ने बताया कि हाल के दिनों में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण कई छोटे उद्योग लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। ऐसे समय में बड़े उद्योगपतियों को छोटे उद्योगों के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सभी व्यापारी उद्योगों के सामूहिक हित को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेंगे, तो उद्योग की स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सकता है।

उन्होंने श्रमयोगियों से भी अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि उन्हें कोई भ्रामक जानकारी मिलती है तो वे अपने प्रतिष्ठान के मालिक या संबंधित उद्योगपतियों से संपर्क कर उसकी पुष्टि करें और अफवाहों के बजाय सही जानकारी पर विश्वास करें।

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