सूरत : खाड़ी युद्ध के असर से वीविंग इंडस्ट्री पर संकट, बुनकरों ने सप्ताह में 2–3 दिन अवकाश रखने की दी सलाह
यार्न की कीमतों में तेज़ उछाल और सप्लाई बंद होने से उत्पादन प्रभावित, आयातित सस्ते धागे की उपलब्धता की मांग
सूरत। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर भी दिखाई देने लगा है।
कच्चे तेल (क्रुड ऑईल) की कीमतों में तेज़ वृद्धि के कारण विभिन्न प्रकार के धागों (यार्न) की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और तुरंत डिलीवरी भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में बुनकरों के लिए ग्रे कपड़ा तैयार करना मुश्किल होता जा रहा है।
वीवर्स लीडर एवं सचिन इंडस्ट्रियल सोसायटी के सचिव मयुर गोलवाला ने कहा कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में बुनकर ग्रे कपड़ा बनाने का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं, तो उन्हें सप्ताह में 2 से 3 दिन उत्पादन बंद रखकर अवकाश लेना अधिक उचित होगा। साथ ही उन्होंने सरकार से सस्ते और अच्छी गुणवत्ता वाले आयातित धागे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि बुनाई उद्योग चलता रहे और हजारों श्रमिकों की नौकरियां सुरक्षित रह सकें।
उन्होंने बताया कि 4 मार्च को कच्चे तेल की कीमत लगभग 73 डॉलर थी, जो बढ़कर करीब 100 डॉलर पर आ गई। कच्चा तेल धागा बनाने का प्रमुख कच्चा माल है। इसकी कीमतों में अचानक आई वृद्धि से सूरत, जो एमएमएफ टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र है, को भारी नुकसान हो रहा है। शहर में रोजाना हजारों टन पॉलिएस्टर, विस्कोस और नायलॉन यार्न की खपत होती है।
पिछले 7 से 10 दिनों में स्पिनरों द्वारा पॉलिएस्टर यार्न की कीमत में लगभग 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है। वहीं पिछले एक सप्ताह में नायलॉन मदर यार्न और फिलामेंट यार्न के दाम 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक बढ़ा दिए गए हैं। सोमवार को खुले बाजार में नायलॉन स्पिनरों ने बुनकरों को संदेश भेजकर यार्न की बिक्री बंद होने की जानकारी दी, जिससे बुनकरों में चिंता बढ़ गई है।
मयूर गोलवाला ने कहा कि स्पिनर पिछले एक सप्ताह से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर धागे के भाव तय कर रहे हैं और वह भी केवल रेडी डिलीवरी की शर्त पर। इससे बुनकरों की पूंजी लागत बढ़ रही है, जबकि बाजार में ग्रे कपड़ा व्यापारियों से भुगतान का मानक लगभग 30 दिन का है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्पिनरों द्वारा कृत्रिम कार्टेल बनाकर धागे की आपूर्ति रोकने और कीमतें बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में आने वाले दिनों में कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ़ इंडिया में शिकायत दर्ज कराने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि ऐसे कार्टेल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
गोलवाला ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में कुछ नायलॉन स्पिनरों द्वारा आयातित नायलॉन यार्न पर MIP (मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस) या ADD (एंटी-डंपिंग ड्यूटी) लगाने की मांग की जा रही है, जो हजारों छोटे बुनकरों के हितों के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि आयातित नायलॉन यार्न पर ऐसी पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो बाजार में कुछ ही स्पिनरों की मोनोपॉली बन सकती है, जिससे छोटे बुनकरों की स्थिति और कमजोर हो जाएगी।
उन्होंने सरकार से अपील की कि छोटे नायलॉन यार्न उपयोग करने वाले हजारों बुनकरों के हितों को ध्यान में रखते हुए आयातित धागे पर प्रतिबंध लगाने के बजाय उद्योग को राहत देने वाले कदम उठाए जाएं।
