सूरत : '181 अभयम' सेवा के 12 साल बेमिसाल; लाखों महिलाओं के लिए बनी 'संकट की साथी'

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सुरक्षा कवच की वर्षगांठ, गुजरात में 18.10 लाख महिलाओं को मिला सहारा; सूरत जिले में 1.38 लाख मामलों में दी गई तत्काल मदद

सूरत : '181 अभयम' सेवा के 12 साल बेमिसाल; लाखों महिलाओं के लिए बनी 'संकट की साथी'

सूरत, 8 मार्च, 2026 – गुजरात की नारी शक्ति को सुरक्षा और सम्मान का अहसास कराने वाली '181 अभयम महिला हेल्पलाइन' आज अपनी सेवा के 12 गौरवशाली वर्ष पूरे कर रही है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में, यह हेल्पलाइन आज राज्य की हर बेटी और महिला के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच बन चुकी है।

 पिछले 12 वर्षों के सफल संचालन के दौरान, सूरत जिले में '181 अभयम' ने संकट में फंसी महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है। सूरत जिले में कुल 1,38,137 मामलों में महिलाओं को सलाह, मार्गदर्शन और रेस्क्यू में मदद दी गई।

अभयम रेस्क्यू वैन ने घटनास्थल पर पहुंचकर 27,521 महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान की।

अकेले पिछले वर्ष सूरत से 15,009 कॉल आए, जिनमें से घरेलू हिंसा (7,262), वैवाहिक विवाद (1,146) और शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न (2,125) के मामलों में त्वरित कार्रवाई की गई।

8 मार्च, 2015 को शुरू हुई यह सेवा आज तकनीक और संवेदनशीलता का अनूठा संगम है। पिछले 12 वर्षों में पूरे गुजरात में 18,10,913 से अधिक महिलाओं को परामर्श देकर सशक्त बनाया गया।

 गंभीर परिस्थितियों में फंसी 1,09,886 महिलाओं को सफलतापूर्वक बचाकर सुरक्षित शेल्टर होम पहुंचाया गया।मौके पर ही प्रभावी काउंसलिंग के जरिए 2.29 लाख से अधिक आपसी झगड़ों का निपटारा किया गया।

पैनिक बटन और जीपीएस वैन '181 अभयम' केवल एक फोन नंबर नहीं, बल्कि एक आधुनिक सुरक्षा तंत्र है।

इसमें मौजूद 'पैनिक बटन' और 'फोन शेकिंग' जैसे फीचर्स मुसीबत के समय बिना कॉल किए भी महिला की लोकेशन हेल्पलाइन सेंटर तक पहुंचा देते हैं। राज्य में कार्यरत 59 अत्याधुनिक रेस्क्यू वैन जीपीएस ट्रैकिंग से लैस हैं, जो महिला पुलिस और ट्रेंड काउंसलर्स के साथ 24x7 सक्रिय रहती हैं।

यह हेल्पलाइन घरेलू हिंसा के अलावा साइबर क्राइम, कानूनी सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी देती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मदद मांगने वाली महिला की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

गुजरात में रहने वाली अन्य राज्यों की महिलाएं भी इस मुफ्त सेवा का लाभ उठा सकती हैं। '181 अभयम' ने पिछले दशक में साबित किया है कि तकनीक और खाकी के पीछे एक संवेदनशील दिल भी धड़कता है, जो हर पीड़ित महिला को 'अभय' (डर से मुक्त) होने का विश्वास दिलाता है।