राजकोट : पढ़ाई के अधिकार के लिए बेटी की लड़ाई में साथ बना सखी वन स्टॉप सेंटर

परिवार के मानसिक उत्पीड़न के बावजूद 19 वर्षीय छात्रा ने सुरक्षित दिया कॉलेज का परीक्षा, सामाजिक संगठनों ने किया सहयोग

राजकोट : पढ़ाई के अधिकार के लिए बेटी की लड़ाई में साथ बना सखी वन स्टॉप सेंटर

परिवार के विरोध और मानसिक उत्पीड़न के बीच एक 19 वर्षीय छात्रा की पढ़ाई जारी रखने की जिद में सखी वन स्टॉप सेंटर मजबूत सहारा बनकर सामने आया। सेंटर और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से छात्रा ने सुरक्षित तरीके से अपने कॉलेज की परीक्षा भी दी।

जानकारी के अनुसार छात्रा बी.ए. के दूसरे वर्ष (Sy.BA) में अध्ययनरत है। काउंसलिंग के दौरान सामने आया कि उसके माता-पिता और बड़ी बहन पढ़ाई को लेकर उस पर लगातार मानसिक दबाव बना रहे थे। बड़ी बहन द्वारा उसके चरित्र पर संदेह जताते हुए कॉलेज जाने से रोकने की कोशिश की गई और उसे मारपीट तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।

परीक्षा देने से रोकने के डर से छात्रा ने महिला पुलिस थाने में आवेदन दिया। इसके बाद उसे राजकोट स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर में आश्रय प्रदान किया गया। सेंटर की काउंसलर यास्मीन बहन और कल्पना बहन ने छात्रा की काउंसलिंग कर उसे मानसिक सहारा दिया।

इस दौरान साईंबाबा चैरिटेबल ट्रस्ट की सदस्य रूपलबेन शाह के सहयोग से छात्रा को सुरक्षित रूप से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया गया। परीक्षा समाप्त होने के बाद उसे वापस सखी वन स्टॉप सेंटर लाया गया। छात्रा ने सेंटर और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकी और कॉलेज की परीक्षा में बैठ पाई।

सखी वन स्टॉप सेंटर ने स्पष्ट किया कि छात्रा को केवल परीक्षा दिलाना ही उद्देश्य नहीं था, बल्कि उसके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए निरंतर सहयोग और काउंसलिंग भी जारी रखी जाएगी। साथ ही उचित समय पर परिवार के साथ संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की भी कोशिश की जाएगी।

महिला सुरक्षा और अधिकारों के लिए कार्यरत सखी वन स्टॉप सेंटर ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं को हर संभव सहायता प्रदान करना उनकी प्राथमिकता है, ताकि वे बिना भय के अपने अधिकारों और सपनों को पूरा कर सकें।

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