भारत में ‘सेमीकॉन 2.0’ से शुरू होगा डीप-टेक स्टार्टअप का स्वर्णिम युग

 500 विश्वविद्यालयों में तैयार होंगे 20 लाख इंजीनियर, अश्विनी वैष्णव ने गांधीनगर में पेश किया भविष्य का रोडमैप

भारत में ‘सेमीकॉन 2.0’ से शुरू होगा डीप-टेक स्टार्टअप का स्वर्णिम युग

गांधीनगर, 02 मार्च (वेब वार्ता)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘गुजरात सेमीकनेक्ट कॉन्फ्रेंस 2026’ में ‘सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ का विजन साझा करते हुए कहा कि भारत अब विनिर्माण के बाद ‘डिजाइन इकोसिस्टम’ पर ध्यान केंद्रित करेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ सेमीकॉन 1.0 का लक्ष्य देश में प्लांट स्थापित करना था (जिसके तहत 10 संयंत्रों को मंजूरी मिली), वहीं अब दूसरा चरण भारत को डिजाइनिंग का हब बनाएगा।

इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू डीप-टेक स्टार्टअप्स को मजबूती प्रदान करना है ताकि भारत से ‘क्वालकॉम’ और ‘एनवीडिया’ जैसी दिग्गज वैश्विक कंपनियां निकल सकें। उन्होंने जानकारी दी कि पहले संयंत्र ने व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है।

मंत्री वैष्णव ने युवाओं के लिए संभावनाओं के द्वार खोलते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग जल्द ही 1000 अरब डॉलर का होने वाला है, जिसमें 20 लाख कुशल पेशेवरों की कमी होगी।

भारत इस कमी को पूरा करने के लिए तैयार है। सरकार ने पहले चरण में 85,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य मात्र चार वर्षों में हासिल कर लिया है। अब दूसरे चरण में सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण का दायरा 350 विश्वविद्यालयों से बढ़ाकर 500 विश्वविद्यालयों तक किया जाएगा।

इससे हर राज्य के छात्रों को चिप डिजाइन, निर्माण, टेस्टिंग और सत्यापन जैसे तकनीकी क्षेत्रों में करियर बनाने का निरंतर अवसर मिलेगा।

सेमीकॉन 2.0 की सफलता के लिए केंद्र सरकार देश में सामग्री, मशीनरी, उपकरण और सत्यापन की एक सुस्थापित प्रणाली विकसित करने पर जोर दे रही है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह यात्रा जटिल है, लेकिन सरकार इसे लेकर अत्यंत व्यावहारिक और यथार्थवादी है।

मिशन के इस चरण में केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि टेस्टिंग और मशीन टूल्स के निर्माण की पूरी सप्लाई चेन भारत में ही विकसित की जाएगी।

इस पहल से न केवल भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में एक अनिवार्य शक्ति के रूप में उभरेगा, जिससे लाखों रोजगार के सृजन का रास्ता साफ होगा।