सूरत : होली पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक व्यापार का अनुमान

स्वदेशी उत्पादों की बढ़ी मांग, हर्बल रंग और पारंपरिक वस्तुओं से सजे बाजार

सूरत : होली पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक व्यापार का अनुमान

कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने अनुमान जताया है कि इस वर्ष होली के अवसर पर देशभर में 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने की संभावना है, जो पिछले वर्ष के लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल और कैट गुजरात के चेयरमैन प्रमोद भगत ने बताया कि बाजारों में इस बार स्वदेशी उत्पादों की मांग उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” अभियान का असर साफ दिखाई दे रहा है। इस होली पर भारतीय निर्मित हर्बल गुलाल, प्राकृतिक रंग, पिचकारियां, गुब्बारे, चंदन, पूजन सामग्री, परिधान और अन्य स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है। वर्ष 2021 से पहले जहां बाजारों में चीनी उत्पादों का दबदबा था, वहीं अब भारतीय उत्पादों ने प्रमुख स्थान ले लिया है।

होली से जुड़े सामान के अलावा मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम, फूल-फल, कपड़े, फर्निशिंग फैब्रिक, किराना, एफएमसीजी उत्पादों और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की भी भारी मांग देखी जा रही है। होली खेलने के लिए सफेद टी-शर्ट, कुर्ता-पायजामा, सलवार-सूट और “हैप्पी होली” लिखी टी-शर्ट की खरीदारी भी तेज हो गई है।

कैट के अनुसार केवल दिल्ली में ही लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होने की संभावना है। थोक और खुदरा बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, आकर्षक पिचकारियों, गुजिया और ड्राई फ्रूट पैकों से सजे हैं तथा दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। मिठाई की दुकानों पर पारंपरिक मिठाई गुजिया की बिक्री में विशेष उछाल देखा जा रहा है।

देशभर में होली मिलन समारोह भी बड़े स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। दिल्ली में विभिन्न व्यापारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा 3000 से अधिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं, जिसके चलते बैंक्वेट हॉल, फार्महाउस, होटल, रेस्टोरेंट और सार्वजनिक पार्क लगभग पूरी तरह बुक हो चुके हैं। इस वर्ष लोग केमिकल रंगों के बजाय हर्बल और प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि बच्चों में लोकप्रिय पात्रों वाली पिचकारियां खास आकर्षण बनी हुई हैं।

पदाधिकारियों ने कहा कि भारत में त्योहार केवल सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव ही नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति देते हैं। इस वर्ष की होली देशभर के व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, छोटे उद्यमियों और एमएसएमई क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध होगी तथा स्वदेशी व्यापार को और मजबूती देगी।

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