सूरत : प्राण-प्रतिष्ठा के 31 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष आयोजन, श्री गोवर्धन प्रभु छप्पन भोग मनोरथ 22 फरवरी को

सात दिवसीय पुष्टि उत्सव का शुभारंभ, भक्तों को दर्शन के लिए आमंत्रण

सूरत : प्राण-प्रतिष्ठा के 31 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष आयोजन, श्री गोवर्धन प्रभु छप्पन भोग मनोरथ 22 फरवरी को

श्री गोवर्धन ट्रस्ट द्वारा संचालित पुष्टि मार्ग हवेली में सात दिवसीय पुष्टि उत्सव का शुभारंभ 16 फरवरी से हुआ है। हवेली की प्राण-प्रतिष्ठा फाल्गुन कृष्ण पक्ष दशमी, विक्रम संवत 2051 (26 मार्च 1995) को नित्य लीलास्थ परम पूज्य 108 श्री व्रजरत्नलालजी महाराज की कृपा से संपन्न हुई थी। अगले माह इस प्राण-प्रतिष्ठा के 31 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे। वर्तमान में हवेली में विराजमान लालन स्वरूप स्वर्गीय श्रीमती शशिकलाबेन शाह के घर-सेवा के ठाकोरजी हैं और उनकी प्रेरणा से ही इस हवेली का निर्माण हुआ था।

ट्रस्ट के हेमंतभाई और मनोजभाई ने बताया कि उत्सव के तहत 20 फरवरी को शाम 6 से 8:30 बजे तक श्री गोवर्धन प्रभु छाकलीला, 21 फरवरी को सुबह 8 से 10 बजे तक श्री बालकृष्ण प्रभु नंद उत्सव तथा शाम 6 से 8:30 बजे तक केशर घटा में चांदी का बंगला एवं श्री गिरिराजजी महाभोग मनोरथ आयोजित होगा। 22 फरवरी को दोपहर 12 से शाम 6 बजे तक श्री गोवर्धन प्रभु छप्पन भोग मनोरथ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस अवसर पर मिहिरभाई मारफतिया, दीपकभाई, हरीशभाई सहित अन्य महानुभाव मौजूद रहे। 

पुष्टि मार्ग की स्थापना श्री वल्लभाचार्य ने की थी तथा इसकी सेवा व्यवस्था श्री गुसाईंजी ने निर्धारित की। इस परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की सेवा की जाती है। हवेली का हाल ही में जीर्णोद्धार किया गया है, जिसमें निजी मंदिर, विशाल दर्शन-खंड, कार्यालय, बालभोग कक्ष, गिरिराजजी की स्थापना तथा सत्संग हॉल बनाया गया है।

छप्पन भोग का विशेष महत्व वैष्णव संप्रदाय में माना जाता है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाया, तब उन्होंने कुछ भी ग्रहण नहीं किया। इसके बाद गोपियों ने सात दिन के आठ प्रहर के अनुसार कुल 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए। यही परंपरा आज भी भक्ति, समर्पण और आभार के प्रतीक के रूप में निभाई जाती है।

कार्यक्रम के लिए हवेली के डुमस रोड की ओर खुले मैदान में पार्किंग और कतार व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु राहुलराज मॉल के सामने सर्विस लेन से प्रवेश कर गेट नंबर 1 से दर्शन-खंड तक पहुंच सकेंगे तथा गेट नंबर 3 से बाहर निकलने की व्यवस्था रहेगी।

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