सूरत : गर्भाशय कैंसर रोकथाम मुहिम को मिला जबरदस्त समर्थन, निःशुल्क टीकाकरण शिविर में 108 महिलाओं का वैक्सीनेशन

अग्रवाल समाज ट्रस्ट के हेल्थ सेंटर में लगातार चौथा कैंप आयोजित, भामाशाहों के सहयोग से सेवा विस्तार

सूरत : गर्भाशय कैंसर रोकथाम मुहिम को मिला जबरदस्त समर्थन, निःशुल्क टीकाकरण शिविर में 108 महिलाओं का वैक्सीनेशन

अग्रवाल समाज ट्रस्ट द्वारा गर्भाशय (सर्वाइकल) कैंसर की रोकथाम के लिए चलाई जा रही मुहिम को अप्रत्याशित सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। अग्रवाल समाज हेल्थ सेंटर पर पिछले चार वर्षों से सर्वाइकल कैंसर प्रतिरोधक टीकाकरण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसे गत माह से भामाशाहों के आर्थिक सहयोग से निःशुल्क कैंप के रूप में आयोजित किया जा रहा है। लाभान्वित परिवारों के मौखिक प्रचार के कारण इस सेवा के प्रति जागरूकता और सहभागिता लगातार बढ़ रही है।

शुक्रवार, 13 फरवरी को आयोजित चौथे निःशुल्क शिविर का आयोजन श्रीमती वीणा संदीप सिंगल के सौजन्य से किया गया, जिसमें 108 बहनों एवं कन्याओं को वैक्सीन लगाई गई। शिविर का शुभारंभ श्रीमती रेणु विकास मित्तल और लायन मोना देसाई द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

इस अवसर पर स्पॉन्सर परिवार के सुशील सिंगल, संदीप सिंगल, स्नेहलता सरावगी, रौनक, हिमांशु एवं गौरव सिंगल सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। ट्रस्ट संरक्षक संजय जगनानी, चेयरमैन श्याम खेतान, सचिव राजू जयबाबा, कोषाध्यक्ष गोवर्धन मोदी तथा उपाध्यक्ष प्रदीप गाड़िया, मोनू देवड़ा, जगमोहन जालान, पवन गुप्ता और राजेश बजावा भी कार्यक्रम में शामिल हुए। हेल्थ सेंटर के चेयरमैन श्रवण शीतल, विनोद चिड़ावावाला, अरविंद गाड़िया, विमल भूत और अजय विद्वातका ने अतिथियों का स्वागत किया।

हेल्थ सेंटर के संस्थापक चेयरमैन सुशील बजाज एवं मार्गदर्शक विजय खेमानी ने बताया कि इस अद्वितीय सेवा के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए आगामी 1 मार्च को भामाशाह मुरारीलाल भूत ने पुनः 108 बेटियों के लिए वैक्सीनेशन और नेत्र चिकित्सा शिविर के आर्थिक सहयोग का संकल्प लिया है। इसके बाद लक्ष्मीपति परिवार द्वारा मेगा वैक्सीनेशन कैंप आयोजित कराने की घोषणा की गई है।

ट्रस्ट अध्यक्ष कोकी अग्रवाल ने कहा कि “एक बेटी की जिंदगी दो परिवारों का भला करती है” और “नारी सुरक्षित तो सृष्टि सुरक्षित” के उद्देश्य से ट्रस्ट द्वारा 1 मार्च को 2100 निराश्रित माताओं को लगभग 40 दिन का राशन वितरित किया जाएगा। इस सेवा कार्य के लिए सहयोग देने वाले भामाशाह ने अपना नाम गुप्त रखते हुए इसे ईश्वर की कृपा बताया है।

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