सूरत : नवी सिविल के हीमोफीलिया केयर सेंटर ने मुंबई के गंभीर मरीज को दी नई ज़िंदगी

निजी अस्पताल में 80 लाख से अधिक का फ्री इलाज कर हाई-रिस्क हीमोफीलिया मरीज का सफल ‘टोटल नी रिप्लेसमेंट’

सूरत : नवी सिविल के हीमोफीलिया केयर सेंटर ने मुंबई के गंभीर मरीज को दी नई ज़िंदगी

सूरत। नवी सिविल हॉस्पिटल, सूरत के हीमोफीलिया केयर सेंटर ने चिकित्सा सेवा और मानवीय संवेदना की मिसाल पेश करते हुए मुंबई के एक गंभीर हीमोफीलिया मरीज को नया जीवन दिया है।

महाराष्ट्र के नालासोपारा निवासी 45 वर्षीय सैमसन एंड्रयू रॉड्रिक्स, जो हीमोफीलिया टाइप-A और हाई टाइटर इनहिबिटर से पीड़ित थे, का सूरत में सफलतापूर्वक टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया।

सैमसन कई वर्षों से दाहिने घुटने के असहनीय दर्द से जूझ रहे थे। पुणे और मुंबई के कई बड़े अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद, गंभीर इनहिबिटर होने के कारण हर जगह सर्जरी संभव नहीं हो पाई। अंततः सूरत के नवी सिविल हॉस्पिटल के हीमोफीलिया केयर सेंटर में उन्हें आशा की किरण मिली।

हीमोफीलिया केयर सेंटर के मार्गदर्शन में सैमसन को जनवरी माह में सूरत में भर्ती कराया गया। करीब एक महीने तक चले इलाज और सर्जरी के दौरान लगभग 80.60 लाख रुपये मूल्य के इंजेक्शन और दवाइयों का उपयोग किया गया, जो पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराए गए। आज सैमसन बिना वॉकर के चल पा रहे हैं और सामान्य जीवन की ओर लौट चुके हैं।

अपनी खुशी व्यक्त करते हुए सैमसन ने कहा, “कई जगहों पर इलाज फेल होने के बाद सूरत के हीमोफीलिया केयर सेंटर ने लाखों रुपये का फ्री इलाज कर मुझे नई ज़िंदगी दी। आज मैं अपने पैरों पर चल पा रहा हूं, यह मेरे और मेरे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।

हीमोफीलिया केयर सेंटर के प्रबंधक निहाल भटवाला ने बताया कि नवी सिविल हॉस्पिटल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धारित्री परमार के मार्गदर्शन में आर्थोपेडिक विभाग के प्रमुख डॉ. हरि मेनन, डॉ. नितिन चौधरी और उनकी पूरी मेडिकल टीम ने यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की। विशेषज्ञों की निगरानी में इलाज पूरा होने के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है।

नर्सिंग काउंसिल के उपाध्यक्ष इकबाल कड़ीवाला ने बताया कि सूरत का यह हीमोफीलिया केयर सेंटर पूरे गुजरात में एकमात्र समर्पित केंद्र है, जो राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई महंगी दवाइयों, आधुनिक इलाज और टीमवर्क के ज़रिए लगातार सराहनीय सेवाएं दे रहा है। वर्ष 2025 के दौरान नवी सिविल हॉस्पिटल में हीमोफीलिया मरीजों की करीब 17 बड़ी सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं।

हीमोफीलिया मरीज को जब फैक्टर दिया जाता है, तो कुछ मामलों में शरीर उस फैक्टर के खिलाफ एंटीबॉडी बना लेता है, जिसे इनहिबिटर कहा जाता है। इनहिबिटर पॉजिटिव मरीजों में सामान्य फैक्टर असर नहीं करता, जिससे ब्लीडिंग कंट्रोल करना बेहद कठिन हो जाता है। ऐसे मरीजों का इलाज फैक्टर VII और FEIBA जैसे बाइपासिंग एजेंट्स से किया जाता है।

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