वडोदरा : सोलो साइकिलिस्ट आशा मालवीय: पश्चिम से पूरब तक भारत को जोड़ती महिला सशक्तिकरण की ऐतिहासिक यात्रा
7,800 किमी की सोलो साइकिलिंग के जरिए देशभक्ति, आत्मनिर्भरता और नारी शक्ति का सशक्त संदेश
78वें इंडियन आर्मी डे से प्रेरणा लेकर नेशनल लेवल की साइकिलिस्ट एवं पर्वतारोही आशा मालवीय इन दिनों पूरे भारत में एक अनोखी और ऐतिहासिक सोलो साइकिलिंग यात्रा पर निकली हैं। यह यात्रा केवल शारीरिक क्षमता या साहस की परीक्षा नहीं, बल्कि देशभर में महिला सशक्तिकरण, देशभक्ति और अटूट संकल्प का सशक्त संदेश देने का एक प्रेरणादायी मिशन है।
वर्तमान में आशा मालवीय वडोदरा में हैं, जहां से वे गोधरा की ओर प्रस्थान करेंगी। वडोदरा पहुंचने पर उन्होंने पुलिस कमिश्नर नरसिंहा कोमर से मुलाकात की तथा विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों से संवाद कर अपनी यात्रा के उद्देश्य और महिला सशक्तिकरण के संदेश को साझा किया। छात्रों के साथ हुई यह प्रेरणात्मक बातचीत विशेष रूप से सराही गई।
यह साइकिल यात्रा राजस्थान के जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड मुख्यालय से प्रारंभ हुई थी। अब तक आशा मालवीय भारत की पश्चिमी सीमा से पूर्वी सीमा तक लगभग 7,800 किलोमीटर की दूरी तय कर चुकी हैं। उनकी हर पैडल महिलाओं में आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत कर रही है।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के नटराम गांव की निवासी आशा मालवीय एक नेशनल लेवल एथलीट हैं। उनकी इस सफलता के पीछे उनकी मां की प्रेरणा और परिवार के त्याग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे अब तक कई ऐतिहासिक और प्रेरणादायी अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी हैं।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में 28 राज्यों में 26,000 किलोमीटर का नेशनल वुमन एम्पावरमेंट साइकिलिंग कैंपेन तथा 17,500 किलोमीटर का “मजबूत सेना, खुशहाल भारत” मिशन शामिल है। इस मिशन के दौरान उन्होंने कारगिल, सियाचिन, उमलिंग ला पास और रेजांग ला मेमोरियल जैसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में साइकिलिंग कर अद्भुत साहस का परिचय दिया। इसके अलावा “सैनिकों के साथ, सैनिकों के लिए” श्रद्धांजलि सवारी, भोपाल–पचमढ़ी साइकिलिंग कैंपेन और साउथ वेस्टर्न कमांड के सहयोग से असारवाला वॉर मेमोरियल से जयपुर तक 800 किलोमीटर की रैली भी उनके उल्लेखनीय अभियानों में शामिल है।
साइकिलिंग के साथ-साथ आशा मालवीय ने पर्वतारोहण में भी अपनी निडरता सिद्ध की है। उन्होंने 20,500 फीट ऊंची बीसी रॉय पीक और 19,545 फीट ऊंची तेनजिंग खान पीक पर सफल चढ़ाई कर अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और साहस का परिचय दिया है। आशा मालवीय की यह यात्रा केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की एकता, राष्ट्रप्रेम और महिला शक्ति का उत्सव है। उनका यह सफर उन सभी भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो हिम्मत, लगन और बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं।
