राजकोट : पेंशन कार्ड ऑनलाइन बनवाने के नाम पर साइबर फ्रॉड, रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 16 लाख की ठगी

राजकोट में रिटायर्ड देना बैंक अधिकारी के मोबाइल का एक्सेस लेकर जालसाजों ने खाली किया खाता, साइबर क्राइम जांच में जुटी

राजकोट : पेंशन कार्ड ऑनलाइन बनवाने के नाम पर साइबर फ्रॉड, रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 16 लाख की ठगी

राजकोट में एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए। पेंशन रिटायर्ड कार्ड ऑनलाइन बनवाने की कोशिश में ठगों ने उनके मोबाइल का एक्सेस हासिल कर बैंक खाते से करीब 16 लाख रुपये निकाल लिए। मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यूनिवर्सिटी रोड स्थित मिलापनगर के पास गुलमोहर सोसायटी, शेरी नंबर-1 में रहने वाले और देना बैंक से स्केल-1 अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हसमुखभाई गणात्रा (उम्र 72) ने पुलिस को बताया कि 6 नवंबर को फेसबुक सर्फिंग के दौरान उन्हें बैंक ऑफ बड़ौदा का एक पेज दिखाई दिया। पेज पर बैंक ऑफ बड़ौदा पेंशन रिटायर्ड कार्ड बनवाने के लिए एक ऑनलाइन फॉर्म उपलब्ध था। चूंकि देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय हो चुका है, इसलिए उन्होंने कार्ड के लिए ‘अप्लाई’ बटन पर क्लिक किया।

शिकायत के अनुसार, अप्लाई करने के करीब एक घंटे बाद एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आया। कॉल के दौरान सामने वाले का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था, केवल बैंक ऑफ बड़ौदा का लोगो नजर आ रहा था। जालसाज ने पेंशन जमा होने वाले बैंक खाते का नंबर, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और पता सत्यापन के नाम पर जानकारी हासिल की। करीब आधे घंटे तक वीडियो कॉल चली, जिसके बाद सामने वाले ने कार्ड जनरेट होने की बात कही।

इसके कुछ ही देर बाद कॉल अचानक कट गई और पीड़ित का मोबाइल फोन लॉक हो गया। मोबाइल कंपनी के सर्विस सेंटर पर ले जाने पर फोन को फॉर्मेट कर वापस दिया गया, जिससे फोन का पूरा डेटा डिलीट हो गया। अगले दिन जब बैंक खाते की जांच की गई तो पता चला कि खाते से करीब 16 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हो चुका है।

ठगी का एहसास होने पर हसमुखभाई गणात्रा ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मोबाइल का पूरा डेटा डिलीट हो जाने के कारण यह पता नहीं चल पाया है कि वीडियो कॉल किस नंबर से आया था।

एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी के साथ इस तरह की ठगी होने से पुलिस भी हैरान है। फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जालसाजों ने किस तकनीक से मोबाइल का एक्सेस लिया और बैंक खाते से रकम ट्रांसफर की।

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