सूरत : करोड़ों के पानी प्रोजेक्ट्स में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका, दर्शन नायक ने मुख्यमंत्री से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

जयंती सुपर कंस्ट्रक्शन' के कामों पर उठे सवाल; एक खुदाई में तीन पाइपलाइन बिछाकर करोड़ों के फर्जी बिल वसूलने का आरोप

सूरत : करोड़ों के पानी प्रोजेक्ट्स में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका, दर्शन नायक ने मुख्यमंत्री से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

सूरत। सूरत जिले में जल आपूर्ति विभाग के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों में एक बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है। गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिवदर्शन कुमार ए. नायक ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल और सूरत कलेक्टर को पत्र लिखकर 'जयंती सुपर कंस्ट्रक्शन' और 'कृष्णा कॉर्पोरेशन' जैसी एजेंसियों द्वारा किए गए कार्यों की तत्काल जांच करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।

शिकायती पत्र में हाल ही में मांडवी तालुका के ताड़केश्वर गांव में हुए हादसे का हवाला दिया गया है। वहां 'जयंती सुपर कंस्ट्रक्शन' द्वारा 21 करोड़ की लागत से बनाई गई 11 लाख लीटर की टंकी पहली बार टेस्टिंग के दौरान ही भरभरा कर गिर गई।

आश्चर्य की बात यह है कि टंकी अपनी क्षमता (11 लाख लीटर) से कम, महज 9 लाख लीटर पानी में ही ढह गई। इस हादसे में तीन मजदूर घायल हुए थे, जिसके बाद सरकार ने कुछ अधिकारियों को निलंबित किया है।

दर्शन नायक ने पत्र में ओलपाड तालुका में चल रहे 150 से 200 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि ओलपाड से कुडियाना, ओरमा और हाथीसा गांव तक तीन अलग-अलग पाइपलाइनें एक ही खुदाई में बिछाई गई हैं, जबकि कागजों पर तीन अलग-अलग खुदाई दिखाकर सरकार से फर्जी भुगतान लिया गया है।

दिहेन गांव में पिछले 10 साल से पानी की टंकी बनी हुई है, लेकिन आज तक उसका उपयोग नहीं शुरू हुआ। अधिकारियों की मिलीभगत से काम पूरा होने और गुणवत्ता के झूठे सर्टिफिकेट जारी करने का भी आरोप लगाया गया है।

 दर्शन नायक ने प्रशासन से निम्नलिखित सख्त कदम उठाने की मांग की है। SVNIT (Sardar Vallabhbhai National Institute of Technology) और GERI (Gujarat Engineering Research Institute) के विशेषज्ञों की टीम बनाकर पिछले 5 साल के सभी प्रोजेक्ट्स की निष्पक्ष जांच हो।

भ्रष्टाचार में संलिप्त एजेंसियों से सरकारी पैसा वसूला जाए और उन्हें हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए। जांच पूरी होने तक संबंधित जल आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का तबादला किया जाए ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।

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