सूरत : बैंक ऑफ बड़ौदा और IIFCL के बीच ऐतिहासिक समझौता, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिलेगी नई रफ्तार

देश की बड़ी परियोजनाओं के लिए संयुक्त रूप से दिया जाएगा ऋण; हरित वित्त और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा विशेष फोकस

सूरत : बैंक ऑफ बड़ौदा और IIFCL के बीच ऐतिहासिक समझौता, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिलेगी नई रफ्तार

सूरत। भारत के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने देश में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास को गति देने के लिए इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (IIFCL) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य व्यवहार्य और प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए 'जॉइंट लेंडिंग' (संयुक्त ऋण) और 'डेट सिंडिकेशन' की सुविधा प्रदान करना है।

इस समझौते पर IIFCL के उप प्रबंध निदेशक श्री पलाश श्रीवास्तव और बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यपालक निदेशक श्री ललित त्यागी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

इस एमओयू के तहत: दोनों संस्थान अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए नई और स्थापित परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देंगे।यह सहयोग विशेष रूप से हरित वित्त (Green Finance), MSME और ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।

श्री पलाश श्रीवास्तव (उप प्रबंध निदेशक, IIFCL): उन्होंने इस साझेदारी को राष्ट्रीय उद्देश्यों के समर्थन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे भारत 'अमृत काल' में आगे बढ़ रहा है, IIFCL टिकाऊ और दीर्घकालिक फाइनेंसिंग को सक्षम बनाकर समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री ललित त्यागी (कार्यपालक निदेशक, बैंक ऑफ बड़ौदा): उन्होंने बैंक की व्यापक उपस्थिति का हवाला देते हुए कहा, "IIFCL के साथ यह सहयोग हमें भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में मदद करेगा। हम अपनी क्षमताओं को एकीकृत कर 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना में सार्थक योगदान देंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गठबंधन से बड़ी परियोजनाओं को फंड जुटाने में आसानी होगी, जिससे न केवल रोजगार के अवसर पैदा होंगे बल्कि देश की लॉजिस्टिक और औद्योगिक क्षमता में भी सुधार होगा। यह साझेदारी टिकाऊ और सुदृढ़ आर्थिक विकास की नींव रखने में मील का पत्थर साबित होगी।