सूरत : भगवान महावीर यूनिवर्सिटी के आर्किटेक्चर छात्रों का चंडीगढ़ स्टडी टूर संपन्न
अर्बन प्लानिंग, मॉडर्न आर्किटेक्चर और सांस्कृतिक विरासत की साइट-बेस्ड स्टडी से मिला व्यावहारिक अनुभव
सूरत। भारत के पहले योजनाबद्ध आधुनिक शहर चंडीगढ़ में 4 से 11 जनवरी 2026 के दौरान सूरत के बीएमयू (भगवान महावीर यूनिवर्सिटी) के आर्किटेक्चर विद्यार्थियों के लिए एक विशेष शैक्षणिक स्टडी टूर का आयोजन किया गया। इस टूर का उद्देश्य छात्रों को अर्बन प्लानिंग, मॉडर्न आर्किटेक्चर और सांस्कृतिक विरासत की एक्सपीरिएंशियल एवं साइट-बेस्ड समझ प्रदान करना था।
स्टडी टूर का नेतृत्व प्रो. सागर देसाई ने किया। उनके साथ प्रो. गोविंद तिवारी, प्रो. राजेश जोशी, प्रो. निसर्ग भनवाडिया और प्रो. भुवनेश मंग्रोलिया भी उपस्थित रहे। टूर की शुरुआत चंडीगढ़ पहुंचने, होटल चेक-इन तथा इंट्रोडक्शन और ओरिएंटेशन सेशन से हुई।
शैक्षणिक गतिविधियों के अंतर्गत सबसे पहले छात्रों ने ली कॉर्बूसियर द्वारा डिज़ाइन किए गए और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में मान्यता प्राप्त कैपिटल कॉम्प्लेक्स का दौरा किया। यहां उन्होंने मॉन्यूमेंटैलिटी, एक्सियल प्लानिंग, सिंबॉलिक एक्सप्रेशन तथा गवर्नेंस और आर्किटेक्चर के आपसी संबंधों का अध्ययन किया, जिससे उन्हें आधुनिक शहरी नियोजन की बुनियादी समझ मिली।
इसके पश्चात छात्रों ने नेक चंद के प्रसिद्ध रॉक गार्डन का भ्रमण किया, जहां रीसायकल सामग्री से निर्मित इस अनोखी संरचना ने सस्टेनेबिलिटी, क्राफ्ट्समैनशिप और व्यक्तिगत रचनात्मक दृष्टि के महत्व को उजागर किया। प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में प्रतिदिन चर्चा और रिव्यू सेशन आयोजित किए गए, जिससे छात्रों ने अपने अवलोकनों को अकादमिक दृष्टिकोण से समझा।
अगले चरण में छात्रों ने चंडीगढ़ के अर्बन स्ट्रक्चर और आर्किटेक्चरल लैंग्वेज का अध्ययन किया। सेक्टर-17 प्लाज़ा के दौरे से पैदल यात्रियों पर केंद्रित कमर्शियल प्लानिंग और पब्लिक लाइफ की समझ विकसित हुई। पियरे जेनेरेट हाउस और ली कॉर्बूसियर सेंटर के विज़िट के माध्यम से रेजिडेंशियल डिज़ाइन, फर्नीचर टाइपोलॉजी, मटीरियल उपयोग, क्लाइमेट-फ्रेंडली डिज़ाइन और स्टैंडर्ड कंस्ट्रक्शन तकनीकों की गहरी जानकारी मिली। इसके अलावा गवर्नमेंट म्यूज़ियम, आर्ट गैलरी और गांधी भवन जैसे संस्थागत भवनों के अवलोकन से पब्लिक आर्किटेक्चर में आकार, संरचना और सांस्कृतिक प्रतीकों के महत्व को समझा गया।
सुखना लेक के दौरे ने अर्बन प्लानिंग में प्राकृतिक तत्वों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को शामिल करने के महत्व को रेखांकित किया। वहीं चंडीगढ़ आर्किटेक्चर म्यूज़ियम के भ्रमण से छात्रों को शहर के विकास की प्रक्रिया को मूल नक्शों, मॉडलों और दस्तावेज़ों के माध्यम से समझने का अवसर मिला।
टूर के एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक हिस्से के रूप में छात्रों ने सेक्टर-बेस्ड हाउसिंग टाइपोलॉजी का विस्तृत अध्ययन और डॉक्यूमेंटेशन किया। इसमें रेजिडेंशियल डेंसिटी, नेबरहुड प्लानिंग, ह्यूमन-स्केल डिज़ाइन, ज़ोनिंग प्रिंसिपल्स और स्टैंडर्डाइज़्ड हाउसिंग की उपयुक्तता का विश्लेषण किया गया। स्केच, मापन, फोटोग्राफी और विश्लेषणात्मक नोट्स के ज़रिए अनुभवात्मक सीख को मज़बूत किया गया।
टूर के दौरान एक दिन का भ्रमण आनंदपुर साहिब भी किया गया। यहां विरासत-ए-खालसा कॉम्प्लेक्स और म्यूज़ियम के अध्ययन से मॉडर्न आर्किटेक्चर, सांस्कृतिक नैरेटिव, सिंबॉलिक डिज़ाइन और स्पेशल सीक्वेंसिंग की समझ विकसित हुई। साथ ही लोकल रोड स्टडीज़ के माध्यम से सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथाओं और अनौपचारिक अर्बन सिस्टम का अध्ययन किया गया।
पूरे टूर के दौरान नियमित साइट-बेस्ड स्टडी, डॉक्यूमेंटेशन और डिस्कशन सेशन्स आयोजित हुए, जिससे छात्रों की ऑब्ज़र्वेशनल स्किल्स, आर्किटेक्चरल स्केचिंग, मैपिंग, फोटोग्राफी और एनालिटिकल थिंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ। फैकल्टी के मार्गदर्शन में कोलैबोरेटिव स्टडी से अकादमिक समझ और भी गहरी हुई।
स्टडी टूर का समापन फाइनल रिव्यू और डिस्कशन सेशन के साथ हुआ, जिसमें पूरे भ्रमण के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभवों का समेकन किया गया। इसके पश्चात छात्र ट्रेन के माध्यम से सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक वापस लौटे।
कुल मिलाकर, यह चंडीगढ़ स्टडी टूर छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रभावी सिद्ध हुआ। इस शैक्षणिक यात्रा के माध्यम से छात्रों ने आर्किटेक्चर और अर्बन प्लानिंग को सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से समझा, जो उनके अकादमिक एवं प्रोफेशनल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
