सूरत : 'को-ऑपरेटिव कॉन्क्लेव 2026' का सफल आयोजन: सहकारिता से समृद्धि की ओर बढ़ते कदम
देशभर में बनेंगी 2 लाख नई सहकारी समितियां, उद्योग और सहकारिता के तालमेल पर चैंबर ऑफ कॉमर्स ने दिया ज़ोर
सूरत। दक्षिण गुजरात सूचना और उद्योग मंडल (SGCCI) द्वारा गुरुवार, 12 मार्च 2026 को सरसाना स्थित प्लैटिनम हॉल में 'को-ऑपरेटिव कॉन्क्लेव 2026' का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक तकनीक के समावेश और उद्योगों के साथ समन्वय स्थापित कर अर्थव्यवस्था को गति देना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और इफको (IFFCO) व NCUI के चेयरमैन दिलीप संघानी ने अपने संबोधन में एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार पूरे देश में एक नया सहकारी ढांचा तैयार कर रही है।
नया लक्ष्य: देश भर में लगभग 2 लाख नई कोऑपरेटिव सोसाइटी बनाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।
डेटा आधारित विकास: ग्राम स्तर से राज्य स्तर तक किए गए गहन सर्वे के आधार पर यह विस्तार किया जाएगा, जिससे जमीनी स्तर पर रोजगार के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे।
क्षेत्रीय विस्तार: श्री संघानी ने जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में पूर्व सैनिकों की सहकारी समितियां बनाकर उत्पादन बढ़ाने और खाली जमीन के सदुपयोग का सुझाव दिया।
चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट निखिल मद्रासी ने स्वागत भाषण में कहा कि कोऑपरेटिव और क्रेडिट सोसाइटियाँ मध्यम वर्ग और छोटे उद्यमियों के लिए सुरक्षा कवच की तरह हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना काल जैसी वैश्विक आपदा के समय भी सूरत के सहकारी बैंकों ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य किया।
सम्मेलन में सहकारिता जगत की विभिन्न हस्तियों ने अपने विचार साझा किए:
डॉ. जीवराज गोधानी (वाइस चेयरमैन, गुजरात स्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी फेडरेशन): उन्होंने आत्मनिर्भरता योजना में क्रेडिट सोसाइटियों की भूमिका की सराहना की और सरकार से 'ज्वैलर्स' के लिए भी ऐसी ही रियायती योजनाएं लाने का आग्रह किया।
कांजी भलाला (डायरेक्टर, वराछा को-ऑपरेटिव बैंक): उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था केवल बड़े कॉर्पोरेट्स पर नहीं टिकी है। देश की कुल सहकारी संस्थाओं में 27% हिस्सेदारी के साथ महाराष्ट्र अव्वल है, जिसके बाद गुजरात का महत्वपूर्ण स्थान है।
हरेश कच्छा (डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार, सूरत): उन्होंने कहा कि अब सहकारिता को कॉर्पोरेट स्तर की कार्यकुशलता तक ले जाने का समय आ गया है। इफको, कृभको और सुमुल इसके जीवंत उदाहरण हैं।
कार्यक्रम का संचालन ग्रुप चेयरमैन परेश लाठिया ने किया और धन्यवाद ज्ञापन वाइस प्रेसिडेंट अशोक जीरावाला ने दिया। इस अवसर पर चैंबर के पूर्व अध्यक्ष विजय मेवावाला, सचिव बिजल जरीवाला, ट्रेजरर सीए मितेश मोदी और मनीष कपाड़िया सहित सहकारिता क्षेत्र के दिग्गज और उद्योगपति बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
