राजकोट : ड्रोन टेक्नोलॉजी से ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण की नई उड़ान
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस-2026 में “ड्रोन दीदी” बंसरीबेन ने साझा की आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस-2026 में विकास, निवेश और नवाचार के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की एक सशक्त झलक देखने को मिली। इस मंच पर देवभूमि द्वारका से आईं “ड्रोन दीदी” बंसरीबेन हडियल की कहानी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में वे अब “ड्रोन दीदी” के नाम से पहचानी जाती हैं, जो ग्रामीण भारत में तकनीक के माध्यम से हो रहे बदलाव की प्रतीक बन चुकी हैं।
सम्मेलन में यह प्रश्न भी सामने आया कि आखिर बंसरीबेन को “ड्रोन दीदी” क्यों कहा जाता है? कभी खेती का काम घंटों की मेहनत और भारी श्रम से जुड़ा होता था, लेकिन आज आधुनिक तकनीक के माध्यम से वही काम महिलाएं कुछ ही मिनटों में कर पा रही हैं। इस बदलाव का सशक्त उदाहरण “नमो ड्रोन दीदी योजना” है, जिसने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है।
सरकार की दूरदर्शी सोच और आधुनिक टेक्नोलॉजी के समन्वय से गांवों में परिवर्तन की नई लहर देखने को मिल रही है। खेती में सफलता के लिए अब बड़े पूंजी निवेश या महंगे उपकरणों की आवश्यकता नहीं रही। सरकार द्वारा दी गई ट्रेनिंग और उपकरणों की मदद से ग्रामीण महिलाएं रोजगार और स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
“नमो ड्रोन दीदी योजना” के तहत प्रशिक्षित महिलाएं ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक छिड़काव कर रही हैं और हर वर्ष लाखों रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। बंसरीबेन ने भी इस योजना का लाभ उठाया। उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में ड्रोन पायलटिंग की थ्योरी और प्रैक्टिकल जानकारी प्राप्त की, साथ ही रिमोट से ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लिया।
बंसरीबेन ने कहा, “सरकार की ओर से मिली ट्रेनिंग और निःशुल्क ड्रोन ने मुझे आत्मनिर्भर बनाया है। ड्रोन टेक्नोलॉजी से न केवल हमें, बल्कि किसानों को भी बड़ा लाभ हुआ है। पंप की बजाय ड्रोन से स्प्रे करने पर समय, मेहनत और पानी—तीनों की बचत होती है। ड्रोन मिलने के बाद हमने काफी तरक्की की है और मेरी तरह कई अन्य महिलाएं भी आगे आई हैं। इसके लिए मैं राज्य सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करती हूं।”
जब बंसरीबेन जैसी “ड्रोन दीदी” वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस-2026 के मंच से अपनी सफलता की कहानियां साझा करती हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार की तकनीक-आधारित योजनाएं गांवों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। आज “ड्रोन दीदी” ग्रामीण भारत की नई पहचान और आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल बन चुकी हैं।
