सूरत : ‘श्रमिक अन्नपूर्णा योजना’ बनी मज़दूरों का संबल, सिर्फ 5 रुपये में भरपेट और पौष्टिक भोजन

सूरत शहर-ज़िले में लाखों श्रमिकों को मिला लाभ, ‘श्रमेव जयते’ के संकल्प को ज़मीन पर उतार रही राज्य सरकार

सूरत : ‘श्रमिक अन्नपूर्णा योजना’ बनी मज़दूरों का संबल, सिर्फ 5 रुपये में भरपेट और पौष्टिक भोजन

ऊंची-ऊंची इमारतों और सपनों के आशियाने खड़े करने वाले कड़िया और निर्माण श्रमिकों के स्वास्थ्य और सम्मान का ध्यान रखते हुए राज्य सरकार की ‘श्रमिक अन्नपूर्णा योजना’ आज लाखों मज़दूरों के लिए वरदान साबित हो रही है। श्रमयोगी कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित यह योजना मज़दूरों को सिर्फ 5 रुपये की मामूली राशि में पौष्टिक, गर्म और सात्विक भोजन उपलब्ध कराकर ‘श्रमेव जयते’ के मंत्र को साकार कर रही है।

कोरोना काल के दौरान कुछ समय के लिए स्थगित की गई यह योजना वर्ष 2023 से सूरत सहित पूरे गुजरात में नए जोश के साथ दोबारा शुरू की गई। महंगाई के इस दौर में, जब बाज़ार में एक सामान्य वड़ापाव की कीमत 20 से 25 रुपये तक पहुंच चुकी है, तब श्रमिक अन्नपूर्णा योजना के तहत मज़दूरों को 5 रुपये में संतुलित भोजन दिया जा रहा है। यह भोजन केवल पेट भरने तक सीमित नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत करने वाले श्रमिकों को आवश्यक पोषण भी प्रदान करता है।

सुबह-सुबह कड़ियानाकों पर परोसी जाने वाली थाली का वजन लगभग 625 ग्राम होता है, जिसमें करीब 1525 कैलोरी का पोषण शामिल रहता है। थाली में रोटी, हरी सब्ज़ी, दाल, चावल और टॉनिक अचार दिया जाता है। श्रमिकों की मेहनत में मिठास घोलने के लिए हर सोमवार को ‘सुखड़ी’ जैसी मिठाई भी परोसी जाती है।

योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए टेक्नोलॉजी का प्रभावी उपयोग किया गया है। गुजरात हाउसिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन श्रमयोगी कल्याण बोर्ड के ‘ई-निर्माण पोर्टल’ पर पंजीकृत मज़दूर अपना ‘ई-निर्माण कार्ड’ दिखाकर भोजन प्राप्त करते हैं। बूथ पर मौजूद कर्मचारी टैबलेट के माध्यम से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर लाभार्थी को रसीद प्रदान करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे।

सरकार की संवेदनशील सोच का एक और उदाहरण यह है कि एक श्रमिक अपने परिवार के छह अन्य सदस्यों के लिए भी उसी रियायती दर पर टिफिन या भोजन ले जा सकता है। इसके अलावा, जिन कंस्ट्रक्शन साइट्स पर 50 से अधिक मज़दूर कार्यरत हैं, वहां श्रमिकों के कार्यस्थल पर ही वाहन के माध्यम से भोजन पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, जिससे उनका समय और ऊर्जा दोनों बच सकें।

योजना की सफलता इसके आंकड़ों से साफ झलकती है। सूरत शहर और ज़िले की 40 कंस्ट्रक्शन साइट्स पर रोज़ाना चार से पांच हज़ार मज़दूर इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। वर्ष 2023 में 11.26 लाख, 2024 में 13.63 लाख और मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025 में अब तक 12.19 लाख श्रमिकों ने पौष्टिक भोजन प्राप्त किया है।

राजस्थान के प्रतापगढ़ से आए श्रमिक रमेशभाई ने बताया कि वह रोज़ इसी योजना के तहत भोजन करते हैं। उन्होंने कहा कि खाना स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है तथा गरीब मज़दूरों के लिए यह योजना बेहद मददगार है। वहीं, सूरत के आज़ादनगर निवासी राजमिस्त्री राजेंद्रभाई ने कहा कि 5 रुपये में मिलने वाला गुणवत्तापूर्ण भोजन उनके जैसे श्रमिकों के लिए किसी राहत से कम नहीं है।

वर्तमान में सूरत शहर के 36 और ज़िले के 4 क्षेत्रों सहित कुल 40 फूड प्लॉट सक्रिय हैं, जबकि पूरे गुजरात में 291 फूड प्लॉट पर श्रमिक अन्नपूर्णा योजना सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। सही मायनों में यह योजना पसीना बहाने वाले मज़दूरों की सेहत, सम्मान और जीवन-स्तर की रक्षक बनकर उभरी है।

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