सूरत : जीवन गणित महोत्सव में ‘राजनीति का गणित’ पर मंथन, शीला भट्ट ने सियासत के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला

राजनीति सिर्फ गणित से नहीं, भाग्य और नैतिकता से भी चलती है : सीनियर पत्रकार व लेखिका शीला भट्ट

सूरत : जीवन गणित महोत्सव में ‘राजनीति का गणित’ पर मंथन, शीला भट्ट ने सियासत के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला

सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को नानपुरा स्थित समृद्धि भवन में ‘जीवन गणित महोत्सव’ की विशेष थीम के अंतर्गत ‘राजनीति का गणित’ विषय पर एक विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नई दिल्ली की वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका श्रीमती शीला भट्ट ने राजनीति के गणित, सत्ता के समीकरण और चुनावी रणनीतियों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में श्रीमती शीला भट्ट ने कहा कि चुनाव से पहले राजनीति का गणित अपने चरम पर होता है। उम्मीदवार का चयन, टिकट वितरण और सत्ता तक पहुंचने की प्रक्रिया ही राजनीति का मूल स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन उसे स्थिर बनाए रखना कहीं अधिक कठिन होता है। इसलिए टिकट उन्हीं उम्मीदवारों को मिलना चाहिए, जो सरकार को मजबूती और स्थिरता दे सकें।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने चुनावी गणित को गहराई से समझा है, इसी कारण उनकी सत्ता लंबे समय तक स्थिर बनी हुई है। साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का भी उल्लेख किया, जिनका पूरे देश की राजनीति पर गहरा प्रभाव रहा। शीला भट्ट ने कहा कि भारत में कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी अपने-अपने स्तर पर बेहद शक्तिशाली हैं, जिसका स्पष्ट उदाहरण पश्चिम बंगाल है। 

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उन्होंने राजनीतिक भूगोल पर चर्चा करते हुए कहा कि केंद्र में सरकार बनाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार में जीत बेहद अहम है। इन राज्यों की जनसंख्या और लोकसभा सीटों की संख्या के कारण दक्षिण भारत अब तक इस फॉर्मूले को तोड़ नहीं पाया है। उन्होंने गुटबाजी को राजनीति का अहम गणित बताते हुए कहा कि यह इंसानी स्वभाव का हिस्सा है और पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। गुटबाजी के आधार पर ही कई नेताओं को राज्यसभा तक पहुंचने का मौका मिला है।

शीला भट्ट ने कहा कि राजनीति के गणित में वफादारी और वोटरों का गणित भी बड़ी भूमिका निभाता है। हालांकि, तमाम राजनीतिक समीकरणों को समझने के बावजूद कई बार उम्मीदवार हार जाते हैं, क्योंकि राजनीति सिर्फ गणित से नहीं चलती, बल्कि भाग्य और नैतिकता जैसे तत्व भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं, जो गणित से कहीं ऊपर हैं।

कार्यक्रम में सूरत के पूर्व महापौर फकीरभाई चौहान विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि “आज राजनीति नहीं रही, बल्कि राजनीति बची है।” चैंबर के पूर्व अध्यक्ष विजय मेवावाला ने स्वागत भाषण दिया, जबकि मानद कोषाध्यक्ष सीए मितिश मोदी ने वक्ताओं का परिचय कराया। कार्यक्रम का सफल संचालन चैंबर के पूर्व अध्यक्ष एवं कार्यक्रम चेयरमैन रूपिन पच्चीगर ने किया।

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