सूरत : भारत विकास परिषद, पश्चिम क्षेत्र का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न

गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा के 10 प्रांतों से 612 प्रतिनिधियों की सहभागिता, सेवा–संस्कार पर रहा विशेष जोर

सूरत : भारत विकास परिषद, पश्चिम क्षेत्र का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न

भारत विकास परिषद, पश्चिम क्षेत्र (पश्चिम भारत) का दो दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन 3 एवं 4 जनवरी 2026 को गुजरात दक्षिण प्रांत के सूरत शहर में भव्य रूप से आयोजित किया गया। सम्मेलन में गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा राज्यों के भारत विकास परिषद के कुल 10 प्रांतों से 612 प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में सेवा क्षेत्र में ख्यातनाम हीरा उद्योगपति एवं धर्मनंदन डायमंड के चेयरमैन लालजीभाई पटेल ने उद्घाटक के रूप में उपस्थित रहकर भारत विकास परिषद के सेवा कार्यों की सराहना की और सेवा व संस्कार से जुड़े अभियानों के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन ने कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार, अंत्योदय सेवा में अधिक सक्रिय होने तथा जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर निर्धन परिवारों को सशक्त करने के कार्यों को गति देने हेतु मार्गदर्शन दिया। पश्चिम क्षेत्र के अध्यक्ष एल.आर. जाजू ने क्षेत्रीय गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए सभी प्रतिनिधियों का शब्दिक स्वागत किया।

यजमान गुजरात दक्षिण प्रांत की ओर से प्रांत अध्यक्ष धर्मेश शाह ने स्वागत उद्बोधन दिया। स्वागत समिति के अध्यक्ष गिरीश लूथरा ने तीनों राज्यों से पधारे प्रतिनिधियों का सूरत की ओर से आतिथ्य भाव से अभिनंदन किया और परिषद के कार्यों को और सशक्त बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन पश्चिम क्षेत्र के महासचिव विनोदभाई लाठिया ने किया।

इस अवसर पर वीएनएसजीयू, सूरत के कुलपति डॉ. किशोरसिंह एन. चावड़ा ने प्रांत पैट्रन के रूप में शिक्षा और संस्कार विषय पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान तीनों राज्यों के 10 प्रांतों के प्रांतीय अध्यक्ष एवं महासचिवों ने अपने-अपने प्रांतों की गतिविधियों की जानकारी दी तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।

भारत विकास परिषद के पांच आयाम—सेवा, संस्कार, संपर्क, पर्यावरण और महिला सहभागिता—पर केंद्रित विचार सत्र आयोजित किए गए। सांस्कृतिक आदान-प्रदान के उद्देश्य से “धरोहर” सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें गरबा, शिव स्तुति, घूमर, एकांकी नाट्य, गीत, काव्य, आदिवासी डांगी नृत्य सहित विभिन्न प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया।

पूर्व एआईसीटीई चेयरमैन डॉ. एस.एस. मंथासर ने सेवा के नए प्रकल्पों और जरूरतों पर मार्गदर्शन दिया। भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय चेयरमैन जे.आर. भट्ट ने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कार्यकर्ताओं को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

समापन सत्र में राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन ने संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पंच परिवर्तन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान किया। बिरसा मुंडा यूनिवर्सिटी, गुजरात के कुलपति डॉ. मधुकरभाई पाड़वी ने भी सम्मेलन को संबोधित कर शुभकामनाएं दीं।

सम्मेलन की स्मृति स्वरूप प्रकाशित होने वाले “अमृतम” स्मारिका का विमोचन किया गया। आयोजन की सफलता में संयोजक कौस्तुभ परीख, सह संयोजक विपुल जरीवाला, प्रांत कोषाध्यक्ष प्रधुमन जरीवाला, भावेश ओझा, विनेश शाह, जयेश गिरी गोस्वामी, भूपत चोपड़ा, आयुषी सभरवाल, दिनेश जैन, प्रतिमा सोनी, रंजन पटेल, उर्वशी पाठक, राजीव शेठ, प्रकाश सलूजा, किरीट पंड्या, नयन पंड्या सहित गुजरात दक्षिण प्रांत की पूरी टीम का विशेष योगदान रहा।।

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