वडोदरा : पेपर क्विलिंग से पहचान बनाने वाली मिसेज केका मंडल, जुनून और मेहनत से रचा कला का अनोखा सफ़र
हाउसवाइफ से सफल आर्टिस्ट तक का सफ़र, बिना गुरु सीखी कला बनी प्रेरणा का स्रोत
मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली और पिछले 25 वर्षों से गुजरात के वडोदरा में निवास कर रहीं 60 वर्षीय मिसेज केका मंडल आज पेपर क्विलिंग आर्ट के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं। एक हाउसवाइफ होने के बावजूद उन्होंने अपने समय को सिस्टमैटिक तरीके से व्यवस्थित कर अपने भीतर के कलाकार को जीवित रखा और अपनी कला को निरंतर निखारा।
मिसेज केका मंडल ने पेपर क्विलिंग की कला किसी संस्था या गुरु से नहीं सीखी। एक सामान्य ट्रेन यात्रा के दौरान, जब उन्होंने एक अन्य कलाकार को कागज से सुंदर आकृतियां बनाते देखा, तभी उनके भीतर छिपी रचनात्मकता जाग उठी। उसी क्षण से उनके कला-सफर की शुरुआत हुई, जो आज भी पूरे उत्साह के साथ जारी है।
शुरुआत में महज़ एक शौक के रूप में अपनाई गई यह कला धीरे-धीरे उनका पैशन और जीवन का अहम हिस्सा बन गई। अपनी लगन और मेहनत के बल पर उन्होंने निजी प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया, जहां एक सरकारी कर्मचारी ने उनकी कला को पहचाना और उन्हें आर्टिसन कार्ड बनवाने का मार्गदर्शन दिया। इस कार्ड के माध्यम से उन्हें गुजरात सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न प्रदर्शनियों और मेलों में भाग लेने का अवसर मिला।
इन प्रदर्शनियों के ज़रिए उनकी कला सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर सीधे लोगों तक पहुंची। सूरत और वडोदरा जिलों में आयोजित कई एग्ज़िबिशन में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी अनेक कलाकृतियां बेचीं और पेपर क्विलिंग आर्ट को व्यापक पहचान दिलाई।
मिसेज केका मंडल का कहना है कि पहले इस तरह की कलाएं स्कूलों में सिखाई जाती थीं, लेकिन आज इन्हें अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है। लोग कलाकृतियों की सराहना तो करते हैं, लेकिन खरीदने में हिचकिचाते हैं। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा, “कला की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन जब कोई आर्टिस्ट अपने काम की कीमत तय करता है, तो उसमें उसके विचार, विज़न, समय, कच्चा माल और अथक मेहनत शामिल होती है। इस मेहनत को पूरा सम्मान मिलना चाहिए।”
पेपर क्विलिंग कला के अंतर्गत मिसेज केका मंडल फ्रिज मैग्नेट, वॉल आर्ट, पेपर क्विल से बनी वॉल क्लॉक, कैंडल होल्डर, हाथ से बने लिफाफे, क्विल इयररिंग्स के साथ-साथ वॉटरकलर पेंटिंग और स्केच भी तैयार करती हैं। इस कला में कागज की पतली पट्टियों को गोंद और विशेष औजारों की मदद से मोड़कर फूल, जानवर और एब्सट्रैक्ट डिज़ाइन बनाए जाते हैं। कभी एक छोटे मैग्नेट को तैयार करने में एक दिन लगता है, तो कभी वॉल आर्ट बनाने में एक सप्ताह तक का समय लग जाता है।
हाउसवाइफ होने के बावजूद मिसेज केका मंडल ने कभी उम्र, कम बिक्री या सीमित संसाधनों को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। उनका यह कला-सफर आज कई महिलाओं और नए कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो यह संदेश देता है कि सच्चा जुनून कभी उम्र या परिस्थितियों का मोहताज नहीं होता।
