झवेरचंद मेघाणी की 129वीं जयंती के उपलक्ष्य में ‘मेघाणी वंदना’ का आयोजन

विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा प्राध्यापकों को मेघाणीजी के जीवन मूल्यों और उनकी साहित्य सेवा के बारे में मार्गदर्शन

झवेरचंद मेघाणी की 129वीं जयंती के उपलक्ष्य में  ‘मेघाणी वंदना’ का आयोजन

सूरत : वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय (वीएनएसजीयू)के गुजराती विभाग द्वारा गुरुवार को झवेरचंद मेघाणी की 129वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम ‘मेघाणी वंदना’ का आयोजन किया गया। गुजराती साहित्य के सुप्रसिद्ध लोकसाहित्यकार, शोधकर्ता-संपादक, कवि, आलोचक और राष्ट्रीय कवि कहलाने वाले मेघाणी की साहित्य साधना को स्मरण करने का यह अवसर पूरे विभाग के लिए गौरवपूर्ण क्षण बन गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग के इंचार्ज डॉ. भरत ठाकोर ने की। उन्होंने विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा प्राध्यापकों को मेघाणीजी के जीवन मूल्यों और उनकी साहित्य सेवा के बारे में मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर विभाग के अध्यापकों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

विद्यार्थियों ने मेघाणी की साहित्य साधना, अनुसंधान और संपादन क्षेत्र में दिए गए अविस्मरणीय योगदान पर विस्तृत चर्चा की और उनकी कृतियों से गीतों की प्रस्तुति भी की। इसके अतिरिक्त, मेघाणी द्वारा संपादित लोकगीतों की सामूहिक मधुर प्रस्तुति से पूरे सभागार में साहित्यिक गर्मजोशी और उत्साह का वातावरण व्याप्त हो गया।

विभाग की प्राध्यापिका डॉ. पन्ना त्रिवेदी ने मेघाणी के अध्ययन काल के दौरान घटित संवेदनशील प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उनके साहित्यकार रूप की अंतरंग भावनाओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि मेघाणी केवल कवि या संपादक ही नहीं थे, बल्कि वे लोकजीवन से गहराई से जुड़े हुए प्रामाणिक जनप्रतिनिधि थे। उन्होंने अपने वक्तव्य में गुजरात सरकार द्वारा धंधुका स्थित चारण कन्या रचना केंद्र में निर्मित मेघाणी म्यूजियम का भी उल्लेख किया।

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अंत में, अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. भरत ठाकोर ने कहा कि मेघाणी के साहित्य में प्रकट होने वाले संवर्धित मूल्य, साहित्य के माध्यम से फैली राष्ट्रप्रेम की भावना और लोकजीवन के प्रति अखंड निष्ठा आज भी अनुकरणीय है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि साहित्य केवल पढ़ने का विषय न रहे, बल्कि उसके मूल्यों को जीवन में उतारना चाहिए। साहित्य की शक्ति समाज परिवर्तन और राष्ट्र को नए आयाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है — जैसे बंगाली कृति आनंदमठ में लिखा गया “वंदे मातरम” गीत स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा स्रोत बना, उसी प्रकार झवेरचंद मेघाणी की कविताएँ भी आज़ादी के आंदोलन में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुईं। आज यह हमारे लिए गर्व का क्षण है कि हम उनके साहित्य को समय-समय पर पुनः पढ़ें और उससे प्राप्त मूल्यों को अपने जीवन में उतारकर समाज में सामाजिक समरसता का निर्माण करें।

इस पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन शोधार्थी रवी मोकाशी ने किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।

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