सूरत में 30 मार्च को हीरा श्रमिकों की हड़ताल, सरकार की उदासीनता पर नाराजगी

सरकार ने 2 दिन में समाधान का दिया था आश्वासन, 10 दिन बाद भी नहीं बनी कार्ययोजना

सूरत में 30 मार्च को हीरा श्रमिकों की हड़ताल, सरकार की उदासीनता पर नाराजगी

सूरत। हीरा उद्योग में जारी मंदी और श्रमिकों की बिगड़ती वित्तीय स्थिति को लेकर सूरत के हीरा श्रमिक 30 मार्च को हड़ताल पर जाएंगे। सरकार द्वारा 2 दिन में समाधान निकालने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद, 10 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे नाराज होकर सूरत हीरा श्रमिक संघ ने हड़ताल की घोषणा कर दी है।

हीरा उद्योग में आई मंदी के चलते पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई है। यूनियन का दावा है कि बीते एक साल में 50 से अधिक हीरा श्रमिक आत्महत्या कर चुके हैं, फिर भी सरकार ने कोई ठोस उपाय नहीं किया।

सूरत डायमंड वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष भावेश टांक ने बताया कि 10 दिन पहले, जब अखिल गुजरात डायमंड एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से मुलाकात की थी, तब मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि सरकार 2 दिनों के भीतर एक कार्ययोजना तैयार करेगी। हालांकि, इतने दिनों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

सूरत समेत पूरे राज्य का हीरा उद्योग आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। श्रमिकों का कहना है कि वे लगातार बढ़ती बेरोजगारी और घटती मजदूरी से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा ठोस समाधान न मिलने से वे मजबूरन हड़ताल करने को बाध्य हैं।

यूनियन ने साफ कर दिया है कि यदि 30 मार्च तक सरकार कोई प्रभावी कदम नहीं उठाती, तो हड़ताल की जाएगी। इस हड़ताल से हीरा उद्योग में कामकाज ठप होने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और निर्यातकों को भी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

 

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